केन्द्रीय मंत्री अमित शाह का नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प को पूरा करने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कटिबद्ध
161 दिन के अंदर बड़े नक्सल एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 141 नक्सलियों का हुआ खात्मा
रायपुर (News27) 16.06.2024 । प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर छत्तीसगढ़ शासन के मंशा अनुरूप चलाये जा रहे अभियान के तहत हमारे जवान नक्सलियों के मांद में घुस कर उनसे लोहा ले रहे हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प को पूरा करने राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में लगातार नक्सलियों के एनकाउंटर या आत्मसमर्पण के लिये विवश हो रहे हैं। नक्सलियों में पुलिस फोर्स के जवानों का ऐसा खौफ पहले नहीं देखा गया। बस्तर के वादियों में हमारे जवान नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने मोर्चा संभाले हुए हैं। 161 दिन के अंदर बड़े नक्सल एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने 141 नक्सलियों को मौत के घाट उतारे हैं। इससे पूर्व 10 मई को बीजापुर में पुलिस फोर्स ने एनकाउंटर में 12 नक्सलियों को मौत की नींद सुलाई थी। 16 अप्रैल को कांकेर में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गये थे। यह देश की सबसे बड़ी नक्सली मुठभेड़ थी, जिससे नक्सली डर के भय से कांप उठे थे। 30 अप्रैल को 9 घंटे तक चली मुठभेड़ जवानों ने 10 नक्सलियों को मार गिराया था। बूझमाड़ के टेकामेटा के जंगलों में डीआरजी और एसटीएफ के जवानों का सामना नक्सलियों से हुआ था। मारे गए नक्सलियों में 3 महिला और 7 पुरुष माओवादी शामिल थे। प्राथमिक तौर पर मुठभेड़ में मारे गये माओवादियों में से 2 की शिनाख्तगी डीवीसीएम जोगन्ना और डीवीसीएम विनय उर्फ अशोक के रूप में हुई थी। इस साल बस्तर रेंज में 141 माओवादी ढेर हो चुके हैं। पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी ने बताया कि वर्ष 2024 में अब तक प्रतिबंधित एवं गैर कानूनी सीपीआई नक्सली संगठन के विरूद्ध चले अभियानों में बस्तर रेंज के तहत कुल 141 नक्सलियों के शव बरामद करने के साथ ही अत्याधुनिक हथियारों में दो एलएमजीए चार एके-47- 04, एक एसएलआर, तीन इंसास, चार 303 रायफल और चार 9एमएम पिस्टल सहित बड़ी संख्या में अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद हुई हैं। इतना ही नहीं मई और जून के महीने में भी सुरक्षाबलों की नक्सलियों की मुठभेंड़ में नक्सली न केवल हताहत हुए बल्कि उनका लगातार मनोबल टूटा है। हाल ही में 8 जून को अबूझमाड़ में छह तो 15 जून को नारायणपुर जिले के ओरछा थाना के फरसबेड़ा धुरबेडा़ के बीच मुठभेंड़ मे 8 नक्सली मारे गये। माना जा रहा है इससे पहले नक्सलियों के खात्मे का ऐसा सिलसिला नहीं चला। वर्तमान में नक्सली अपना मांद छोड़कर या तो भागने में अपनी भलाई समझ रहे हैं या फिर मौत के घाट उतारे जा रहे हैं अन्यथा आत्मसमर्पण के अलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं दिख रहा। दूसरी ओर सरकार लगातार नक्सलियों को बातचीत के लिए आंमत्रित कर जीवन के मुख्यधारा से जुड़ने की अपील के साथ उनका हरसंभव मदद करने की बात भी कह रही है, जिसे नक्सलवाद की दलदल में फंसे पुरूषों व महिलाओं के लिए जीवन की मुख्यधारा में लौट आने का सुनहरा अवसर माना जा रहा है। -फाईल फोटो
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