रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार को 10 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कोई पत्र नहीं भेजा गया है, जैसा कि सोशल मीडिया और कुछ अटकलों में फैलाया जा रहा है। वास्तविक तथ्य यह है कि ईडी ने कुल मिलाकर छह से सात अधिकारी (आईएएस, आईपीएस और अन्य रापुसे अधिकारियों सहित) के खिलाफ केवल कार्रवाई का अनुरोध किया है, न कि किसी प्रकार की तात्कालिक सजा या निष्कर्षण।
यह जानकारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 66(2) के अंतर्गत दी गई है और इसका संबंध सूर्याकांत तिवारी एवं अन्य के प्रकरण से है। ईडी ने यह स्पष्ट किया है कि उनके अनुरोध का स्वरूप केवल इतना है कि संबंधित लोकसेवकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई उचित समझे जाने पर ही की जाए। इसका अर्थ यह है कि यह केवल औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि किसी अधिकारी के खिलाफ अंतिम निर्णय।
जाँच की संवेदनशीलता और वर्तमान चरण को देखते हुए ईडी ने नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। अधिकारियों के नाम को गोपनीय रखने का उद्देश्य जांच की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ईडी ने जनता और मीडिया से अपील की है कि तथ्यों पर आधारित जानकारी ही साझा करें और अफवाहों या अप्रमाणित दावों से दूर रहें। अधिकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई केवल कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।
प्रवर्तन निदेशालय की यह स्थिति दर्शाती है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें अक्सर अतिशयोक्ति या अधूरी जानकारी पर आधारित होती हैं। ऐसे में सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सूत्रों पर भरोसा करना जरूरी है।
सरकार और संबंधित विभाग भी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सभी मामलों में कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी ढांचे के भीतर की जाएगी। किसी भी अधिकारी के खिलाफ जल्दबाजी में निर्णय लेने की स्थिति नहीं है।

