छत्तीसगढ़ी ओलंपिक बंद करने का निर्णय गलत, छत्तीसगढ़ी अस्मिता से खिलवाड़ – दीपक बैज

रायपुर  (News27) 17.07.2024 । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि हमारे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी खेल दिनोंदिन लुप्त होते जा रहे हैं। कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के माध्यम से उनको बढ़ावा देने का प्रयास किया गया था। फुगड़ी गेड़ी, गिल्ली-डंडा, खो-खो, सत्तूल, पिट्ठूल, रस्सी कूद, कुश्ती सहित अनेकों स्थानीय खेलों का आयोजन था। यह सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं था, नागरिकों के समूचे जीवन वृत्त का संगीत था। इसमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिला सभी भाग लेते थे। इसको राजनैतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्यजनक है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इसको बंद करने का निर्णय लिया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ी ओलंपिक को बंद करने की कड़ी आलोचना करती है और सरकार से मांग करती हैं कि छत्तीसगढ़ी ओलंपिक के आयोजन को जारी रखा जाय। हर निर्णय को राजनैतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह छत्तीसगढ़िया अस्मिता का सवाल है, छत्तीसगढ़िया संस्कृति का सवाल है, छत्तीसगढ़ के लोगों के शारीरिक सौष्ठव का सवाल है, इसमें स्तरहीन राजनीति नहीं की जानी चाहिये।

———————————————

पीएससी मामले की सीबीआई जांच भाजपा का पोलिटिकल प्रोपोगंडा – कांग्रेस

सीबीआई जांच तो रमन सिंह के कार्यकाल में हुये पीएससी परीक्षा की होनी चाहिये

रायपुर  (News27) 17.07.2024 । पीएससी मामले की सीबीआई जांच भाजपा का पोलिटिकल प्रोपोगंडा है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पीएससी की तथाकथित गड़बड़ियां भाजपा का दिमाकी फितूर मात्र था विधानसभा चुनाव के समय तत्कालीन कांग्रेस सरकार की छवि खराब करने भाजपा ने गलत आरोप लगाया था। पूर्व मुख्यमंत्री विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का भी बयान आया है कि सीबीआई जांच से युवाओं की शंका दूर होगी अर्थात भाजपा के वरिष्ठ नेता भी पीएससी का गड़बड़ी के आरोपों को शंका मात्र ही मानते है। सीबीआई जांच में भी कुछ हासिल नहीं होने वाला इस जांच से भाजपा के झूठे आरोपों की पोल खुलेगी और सच्चाई सामने आयेगी।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राज्य लोकसेवा आयोग में कथित गड़बड़ी के आरोप भाजपा ने साजिश के तहत लगाया था। अमूमन किसी भी परीक्षा में गड़बड़ियो के यह आरोप लगते है। किसी परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक हुये हों। किसी परीक्षार्थी ने लेनदेन की प्रमाणित शिकायत किया हो। किसी कोचिंग संस्थान के पूर्व अनुमानित प्रश्न पत्रों के सेट से पीएससी के प्रश्न पत्र हू-बहू मिल रहे थे। मेरिट में चयनित अभ्यर्थियों के इंटरव्यू के नंबर लिखित परीक्षा के अंको में बहुत ज्यादा असमानता नजर आ रही थी। चयन का आधार इंटरव्यू के नंबरों की अधिकता हो। वर्तमान में राज्य लोक सेवा आयोग के परीक्षा परिणामों पर ऐसा कोई भी आरोप नहीं लगा था उसके बावजूद गड़बड़ी के मनगढ़ंत आरोप लगाना भारतीय जनता पार्टी का निम्न स्तरीय हथकंडा है। किसी मेरिट में चयनित अभ्यार्थियों के लिखित परीक्षा की अपेक्षा व्यक्तित्व परीक्षण के अचंभित करने वाले या संदेहास्पद नंबर मिले हो तो भी उसके आधार पर चयन सूची पर सवाल खड़ा किया जाये तो भी तार्किफ लगता है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा के पास पीएससी की चयन सूची में गड़बड़ी के आरोपो का आधार क्या है? सिर्फ यही कि पीएससी में नेताओं, अधिकारियों, व्यवसायियों के बच्चों के कुछ नाम चयनित हो गये है। भाजपा को आपत्ति है कि पीएससी में सगे भाई-बहन, पति-पत्नी का चयन कैसे हो गया? जबकि परस्पर रिश्तेदारों का चयन किसी अधिकारी के रिश्तेदारो का चयन या व्यवसायी नेता के रिश्तेदारो का चयन पहली बार नहीं हुआ है और न ही यह अपराध और न ही किसी का रिश्तेदार होना अयोग्यता का पैमाना हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी के समय भी 2004 से 2021 तक भी परस्पर सबंधियो के चयन होते रहे है। इसकी सूची सार्वजनिक हो चुकी है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सीबीआई जांच रमन सिंह के सरकार में हुई परीक्षाओ की होनी चाहिये तब वास्तविक घोटाला सामने आयेगा। रमन सरकार के दौरान 2003 और 2005 में पीएससी भर्ती घोटाला भी सर्वविदित है। 2003 के मामले में अभ्यर्थियों के शिकायत पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा था कि रमन सरकार के दौरान उक्त भर्ती में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी साफ दिख रही है, जांच और स्कैलिंग में षडयंत्र पूर्वक किए गए गड़बड़ी को लेकर उच्च न्यायालय ने कड़े कमेंट किए और उस सूची को निरस्त कर मानव विज्ञान की कॉपियों को पुनः जांचने और फिर से स्कैलिंग कर नई सूची जारी करने का आदेश दिया था। रमन सरकार के दौरान उक्त भर्ती की जांच में यह भी पाया गया कि किसी अभ्यर्थी को 50 नंबर के पूर्णांक के आधार पर तो किसी को उपकृत करने 75 नंबर के पूर्णांक के आधार पर कापियां जांची गई थी। वर्ष 2005 के पीएससी भर्ती के मामले में सभी चयनित अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था। पीएससी के तत्कालीन चेयरमैन अशोक दरबारी सस्पेंड हुए, बिलासपुर हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने पूरी नियुक्ति सूची को ही निरस्त कर दिया था, लेकिन रमन सरकार की मिलीभगत से सुप्रीम कोर्ट से वह सूची बहाल करा दी गई। आज भी 2005 का मामला न्यायालय में लंबित है स्थानीय युवाओं के हक और हित का गला घोट ना रमन सरकार का चरित्र था। अतः उसकी सीबीआई जांच जरूरी है।

————————————————-

अडानी के बिजली कंपनी को फायदा पहुंचाने सरकार ने बिजली दर में वृद्धि किया

रायपुर  (News27) 17.07.2024 । प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा की सरकार ने सरकारी बिजली कंपनियों के बिजली दरों में वृद्धि करके अडानी के बिजली कंपनी को फायदा पहुंचाने का षड्यंत्र रचा है। बिजली दर में वृद्धि और बिजली कटौती एक षड्यंत्र है ताकि उद्योगपति हताश और परेशान होकर निजी बिजली कंपनियों की ओर रुख करने मजबूर हो जाए और इसका सीधा लाभ अडानी के बिजली कंपनी को मिलेगा।अडानी रायगढ़ और रायपुर के अपने थर्मल पावर बिजली उत्पादन संयंत्र की क्षमता 2400 मेगावाट से वृद्धि करने की प्रक्रिया में काम कर रहा है और उसकी मदद भाजपा की सरकार कर रही है। उद्योगपतियों को मिलने वाले सरकारी बिजली का दर 7.60 रुपए से ज्यादा है जबकि अडानी की बिजली कम्पनी 6 रु से कम दर पर प्रति यूनिट बिजली सप्लाई करेंगी। यह सीधा-सीधा षड्यंत्र सरकारी बिजली कंपनी को खत्म करने और निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए किया जा है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद बिजली कटौती आम बात हो गई है और बिजली दर में वृद्धि करके पूरे प्रदेश के जनता और उद्योगपतियों को परेशान किया जा रहा है। बिजली दर में वृद्धि से उद्योगपतियों के सामने दोहरी चुनौती है एक पहले ही उद्योग महंगाई और मंदी से जूझ रहा था। अब बिजली दर में वृद्धि होने से लागत मूल्य में वृद्धि हो गया है जिसका सीधा-सीधा असर लोहा सीमेंट अन्य उत्पादों के दाम में वृद्धि होगा। जिसके चलते मंदी और महंगाई बढ़ेगी और उद्योगों में तालाबंदी की स्थिति निर्मित हो जाएगी।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनहित में बिजली दर में की गई वृद्धि को तत्काल वापस ले। बिजली घर में वृद्धि से प्रदेश का हर वर्ग हताश और परेशान है जिनके घरों में 500रु से 600 रु बिजली के बिल आते थे उनके घरों में अब 900 रु से 1000 रु तक के बिल आ रहे हैं। उद्योगों में लागत मूल्य प्रति टन लोहा में लगभग 1000 रु से 2500 रु की वृद्धि हो गई है। प्रदेश के सरकारी बिजली कंपनियों से 60 प्रतिशत बिजली की खपत उद्योगों में होती है यदि उद्योग निजी कंपनियों से बिजली लेना शुरू कर देंगे तो उसका नुकसान सरकारी कंपनियों को होगा और सरकारी बिजली कंपनी घाट में चलेगी जिसके चलते तालाबंदी हो जाएगी।आम जनता और किसानों को बिजली के संकट से जूझना होगा निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार के द्वारा किया गया कार्य निंदनीय है।

———————————————————————————-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top