बैकुंठ सीमेंट उद्योग के खिलाफ प्रदर्शन, श्रमिकों ने कहा अल्ट्राटेक की तानाशाही नहीं चलेगी

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपा

वीरेन्द्र साहू, तिल्दा-नेवरा । इंकलाब जिंदाबाद, मजदूर एकता जिंदाबाद” के नारों से शनिवार को तिल्दा-नेवरा की गलियां गूंज उठीं। अल्ट्राटेक बैकुंठ सीमेंट वर्क्स (आदित्य बिड़ला ग्रुप) में श्रमिकों की हड़ताल के ग्यारहवें दिन संयुक्त ट्रेड यूनियन बैकुंठ के बैनर तले श्रमिकों ने प्रबंधन के तानाशाही रवैये के खिलाफ श्रमिक अधिकार रैली निकाली।

रैली बैकुंठ सीमेंट उद्योग के मुख्य द्वार से शुरू होकर तिल्दा-नेवरा एसडीएम कार्यालय तक पहुंची, जहां मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम पर ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान “अल्ट्राटेक की तानाशाही नहीं चलेगी” और “हम अपना अधिकार लेकर रहेंगे” जैसे नारे लगाते हुए श्रमिकों ने आक्रोश व्यक्त किया।

संयुक्त ट्रेड यूनियन के महासचिव कमलेश वर्मा ने बताया कि पिछले दो वर्षों से यूनियन द्वारा बैकुंठ सीमेंट वर्क्स प्रबंधन की तानाशाही और श्रमिकों के शोषण की शिकायत शासन-प्रशासन से की जा रही है। उन्होंने कहा कि 9 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम पर उनके सचिव पी. दयानंद को मंत्रालय में पत्र देकर श्रमिकों की समस्याओं पर हस्तक्षेप की मांग की गई थी, परंतु शासन-प्रशासन की चुप्पी के कारण हालात बिगड़ते चले गए।

कमलेश वर्मा ने कहा कि अब मजदूरों का सब्र जवाब दे चुका है। प्रबंधन की मनमानी और संवादहीनता के कारण विवाद संघर्ष का रूप ले चुका है। “हम अपने अधिकार लेकर रहेंगे, चाहे इसके लिए कितना भी लंबा संघर्ष क्यों न करना पड़े।”

रैली के दौरान श्रमिकों ने प्रमुख मांगें रखीं

बैकुंठ सीमेंट वर्क्स को तुरंत चालू किया जाए।

निलंबित श्रमिक प्रतिनिधियों को बिना शर्त बहाल किया जाए।

श्रमिकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए।

रुका हुआ बोनस तुरंत दिया जाए।

150 श्रमिकों को पुनः कार्य पर लिया जाए

श्रमिकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। हड़ताल के चलते संयंत्र का उत्पादन ठप है और श्रमिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

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