ओडिशा–छत्तीसगढ़ सीमा पर इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना
तपकरा/फरसाबहार। नागलोक के फरसाबहार इलाके में मंगलवार को ऐसी घटना सामने आई जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में जन्म के तुरंत बाद एक नवजात की मौत हो गई। औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद ओडिशा प्रशासन बच्चे के शव को लठबोरा–उतियाल पुल तक छोड़ गया, जो छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा क्षेत्र है। सीमा पार जशपुर जिले में रहने वाले पिता मुकेश नायक के घर की दूरी महज 8 किलोमीटर थी, लेकिन फिर भी छत्तीसगढ़ से एक भी शव वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया।
परिजन लगातार कॉल करते रहे, 1099 से लेकर स्थानीय प्रशासन तक—लेकिन दो घंटे के इंतजार के बाद भी कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। समय बीतता गया, हालात और दर्दनाक होते गए, और अंततः पिता की मजबूरी उसके ऊपर भारी पड़ गई।
अपनी तकदीर से लड़ते हुए मुकेश नायक ने मृत नवजात को सीने से लगाया, और परिवार व साथी के साथ स्कूटी पर ट्रिपल लोड होकर सिंगीबहार के लिए रवाना हो गए।
सीमा क्षेत्र में खड़े लोग यह दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए—गम, बेबसी और सरकारी तंत्र की विफलता का यह सबसे कड़वा चित्र था।
प्रशासनिक सफाई
जशपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी घनश्याम सिंह जात्रा ने कहा शव वाहन 1099 ने जब कॉल किया, उस समय मोबाइल नहीं लग रहा था। बाद में कॉल रिसिव नहीं हुआ। संचार की कमी के कारण वाहन भेजने में बाधा आई।”
परिवार की पीड़ा और प्रशासनिक बयान—दोनों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा रह गया है:
क्या सिर्फ फोन न लगने की वजह से किसी पिता को अपने बच्चे का शव गोद में उठाकर स्कूटी पर घर लौटने को मजबूर होना चाहिए?
यह घटना बताती है कि संवेदनशील हालात में भी सिस्टम कितनी आसानी से फेल हो सकता है। सीमा क्षेत्रों में समन्वय की कमी और आपात सेवाओं की लापरवाही ने एक परिवार के दुख को और गहरा कर दिया।

