रायपुर, छत्तीसगढ़। साईबर क्राइम एक्सपर्ट श्री जुगल किशोर तिवारी से खास बातचीत में उन्होंने बताया की : आज के डिजिटल युग में, जहाँ हमारे लगभग सभी काम स्मार्टफोन और इंटरनेट पर निर्भर हैं, वहीं एक नया और खतरनाक अपराध तेजी से बढ़ रहा है – साइबर धोखाधड़ी। धोखेबाज़ हर दिन नए-नए तरीके अपनाकर लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ़ कर रहे हैं। जागरूकता की कमी और एक छोटी सी लापरवाही आपको इस जाल में फँसा सकती है।
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कैसे बिछाया जाता है साइबर ठगी का जाल?
साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख तरीके इस प्रकार हैं:
- फिशिंग (Phishing): यह सबसे आम तरीका है। इसमें धोखेबाज़ आपको बैंक, किसी सरकारी योजना या किसी प्रसिद्ध कंपनी के नाम से नकली ईमेल या एसएमएस भेजते हैं। ये संदेश बिल्कुल असली लगते हैं और इनमें एक लिंक दिया होता है। जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करके अपनी व्यक्तिगत जानकारी (जैसे पासवर्ड, ओटीपी, या बैंक विवरण) दर्ज करते हैं, यह जानकारी सीधे ठगों तक पहुँच जाती है।
- केवाईसी (KYC) अपडेट फ्रॉड: “आपका KYC समाप्त हो गया है, तुरंत इस लिंक पर क्लिक करके अपडेट करें, वरना आपका खाता बंद हो जाएगा।” – इस तरह के संदेश भेजकर जालसाज लोगों को डराते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही वे आपसे आपकी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं।
- क्यूआर कोड (QR Code) स्कैम: यह ठगी का एक नया तरीका है। इसमें जालसाज आपको भुगतान प्राप्त करने के बहाने एक क्यूआर कोड भेजते हैं और उसे स्कैन करने के लिए कहते हैं। ध्यान रखें, क्यूआर कोड हमेशा भुगतान करने के लिए स्कैन किया जाता है, भुगतान प्राप्त करने के लिए नहीं। जैसे ही आप कोड स्कैन करके अपना पिन डालते हैं, आपके खाते से पैसे कट जाते हैं।
- नौकरी का झांसा: सोशल मीडिया और ऑनलाइन पोर्टल्स पर आकर्षक वेतन वाली नौकरियों का विज्ञापन देकर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया जाता है। आवेदन के नाम पर उनसे रजिस्ट्रेशन फीस या अन्य शुल्क वसूले जाते हैं और फिर संपर्क बंद कर दिया जाता है।
- ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड: अविश्वसनीय छूट और ऑफ़र दिखाकर नकली शॉपिंग वेबसाइटों के माध्यम से लोगों को लुभाया जाता है। ग्राहक भुगतान कर देते हैं, लेकिन उन्हें या तो नकली सामान मिलता है या कुछ भी नहीं मिलता।
साइबर धोखाधड़ी से कैसे बचें?
थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता हमें इस तरह की धोखाधड़ी से बचा सकती है। इन बातों का हमेशा ध्यान रखें:
- गोपनीय जानकारी साझा न करें: अपना बैंक खाता नंबर, डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी (CVV), पिन, ओटीपी (OTP) या पासवर्ड कभी भी किसी के साथ फोन, ईमेल या एसएमएस पर साझा न करें। कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था यह जानकारी नहीं मांगती है।
- अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अज्ञात या संदिग्ध दिखने वाले ईमेल या एसएमएस में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- वेबसाइट की प्रामाणिकता जांचें: किसी भी वेबसाइट पर अपनी जानकारी दर्ज करने से पहले, सुनिश्चित करें कि उसका यूआरएल (URL) https:// से शुरू होता है। ‘http’ वाली वेबसाइट सुरक्षित नहीं होती।
- मजबूत पासवर्ड का प्रयोग करें: अपने सभी ऑनलाइन खातों के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड बनाएं, जिसमें अक्षर, अंक और विशेष प्रतीकों (जैसे @, #, $) का मिश्रण हो।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्रिय करें: जहाँ भी संभव हो, अपने सोशल मीडिया, ईमेल और बैंकिंग खातों के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ज़रूर चालू करें। यह सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ता है।
- सार्वजनिक वाई-फाई (Public Wi-Fi) से बचें: सार्वजनिक या मुफ्त वाई-फाई का उपयोग करते समय ऑनलाइन बैंकिंग या वित्तीय लेनदेन करने से बचें, क्योंकि ये सुरक्षित नहीं होते हैं।
धोखाधड़ी होने पर क्या करें?
अगर दुर्भाग्य से आप किसी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, तो घबराएं नहीं।
- सबसे पहले, भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें।
- इसके साथ ही, अपने बैंक को सूचित करके तुरंत अपना कार्ड और खाता ब्लॉक करवाएं।
याद रखें, डिजिटल दुनिया में आपकी सतर्कता ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें।

