जशपुरनगर।एनएचएम कर्मचारी संघ का अनिश्चितकालीन आंदोलन 23वें दिन भी पूरे उत्साह और दृढ़ता के साथ जारी रहा। संघ ने अपने पदाधिकारियों पर हुई बर्खास्तगी की कार्रवाई को नियमविरुद्ध और असंवेदनशील बताते हुए कहा कि सरकार का रवैया सुशासन नहीं बल्कि कुशासन की ओर इशारा करता है।
दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप
कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि जहां एक ओर स्वास्थ्य मंत्री आंदोलन को संवैधानिक अधिकार बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से कर्मचारियों पर कार्रवाई कर उनके मनोबल को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
जल सत्याग्रह से सरकार की नीतियों का विरोध
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पांच मांगें पूरी करने के बयान का संघ ने खंडन किया। आश्वासन और कमेटी गठन की प्रक्रिया से नाराज़ कर्मचारियों ने आज जशपुर में रैली निकालकर जल सत्याग्रह किया और उग्र नारेबाजी करते हुए अपनी दस सूत्रीय मांगों पर लिखित आदेश की मांग की।
कार्यवाही से और तेज हुआ आंदोलन
संघ पदाधिकारियों पर हुई प्रशासनिक कार्यवाही के बाद कर्मचारियों का हौसला और मजबूत हो गया है। पूरे प्रदेश में एनएचएम कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देने और अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई
अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। आगामी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भी स्थगित करना पड़ा है। जशपुर जिले की कई स्वास्थ्य संस्थाएं बंद हैं, जबकि कुछ सीमित मानव संसाधन के अभाव में अंतिम सांसें ले रही हैं।
शत्रुधन बघेल का कहना है कि जब तक उनकी दस सूत्रीय मांगों पर ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं किए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

