संघर्ष-गाथा न्याय, साहस और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है
पतराटोली चौक में मुख्यमंत्री साय से रानी दुर्गावती की प्रतिमा की मांग
जशपुर । दुलदुला । गोंड समाज द्वारा मंगलवार को
दुलदुला जनपद के पतराटोली एन एच 43 स्थित रानी दुर्गावती चौंक में रानी दुर्गावती
शहादत दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम में गोंड समाज समेत आस पास के सैकड़ो लोग शामिल हुये। इस अवसर पर रानी दुर्गावती की छाया चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दिया गया। इस दौरान रानी दुर्गावती की
अदम्य वीरता, बलिदान और आत्मसम्मान को स्मरण किया गया। इस संबंध में पतराटोली सरपंच शांति सिंह ओटी ने बताया की रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के किले में हुआ था, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित है। उनका विवाह 18 साल की उम्र में गोंडवाना के राजा दलपत शाह से हुआ था। रानी दुर्गावती एक महान भारतीय योद्धा और गोंडवाना की रानी थीं, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में मुगल शासक अकबर के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। उनका जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर में हुआ था । रानी दुर्गावती ने मातृभूमि की रक्षा हेतु मुग़ल साम्राज्य से संघर्ष करते हुए 24 जून 1564 को मुगल सेना से लड़ते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनकी संघर्ष-गाथा हमें न्याय, साहस और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
पुत्र ने गोंडवाना साम्राज्य का शासन संभाला
1550 में राजा दलपत शाह की मृत्यु के बाद, रानी दुर्गावती ने अपने नाबालिग पुत्र वीर नारायण के संरक्षक के रूप में गोंडवाना साम्राज्य का शासन संभाला। गोंड समाज के लोगों ने कहा दुलदुला जनपद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का विधानसभा क्षेत्र हैं रानी दुर्गावती चौक पर उनकी प्रतिमा स्थापित किया जाना चाहिए ताकि उनका शौर्य पराक्रम को याद रखा जा सकें। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से रानी दुर्गावती की प्रतिमा स्थापित की मांग रखी जायेगी। इस अवसर पर पतराटोली सरपंच शांति सिंह ओटी मुख्य अतिथि , उपसरपंच देवेंद्र सिंह जगत , बैगा द्वितीया जगत, प्रमुख रूप से गोंड समाज के युवा वर्ग हुये वाक समुदाय के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।

