घरघोड़ा में अनुसूचित जाति परिवार का मकान ढहा, चार दिनों से अनशन पर बैठा पूरा परिवार

पीड़ित ने उच्च अधिकारियों से लगाई न्याय की गुहार, तहसीलदार और पुलिस पर गंभीर आरोप

रायगढ़। घरघोड़ा कस्बे में अनुसूचित जाति के भरत खंडेल का मकान और दुकान जेसीबी से ढहा दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। न्याय और मुआवज़े की मांग को लेकर भरत खंडेल का परिवार पिछले चार दिनों से धसे हुए घर के बाहर अनशन पर बैठा है।

क्या है मामला

वार्ड क्रमांक 07 निवासी भरत खंडेल (42 वर्ष), जाति सतनामी , का कहना है कि 23 सितम्बर 2025 को तहसीलदार मनोज गुप्ता, नायब तहसीलदार साहोदरराम पैंकरा, राजस्व निरीक्षक चौहान और थाना प्रभारी घरघोड़ा की मौजूदगी में जेसीबी बुलाकर उनकी झोपड़ीनुमा मकान और दुकान को जबरन तोड़ दिया गया।

खंडेल के मुताबिक

उनके पिता स्व. प्रहलाद खंडेल ने 50 वर्ष पहले खसरा नंबर 455/7, रकबा 0.162 हेक्टेयर भूमि पर झोपड़ी बनाकर निवास शुरू किया था।

इस भूमि पर उनका लगातार कब्ज़ा रहा है, जिसकी पुष्टि तहसीलदार ने पूर्व आदेशों में भी की थी।

मकान ढहाए जाने से मोबाइल रिपेयरिंग का उनका काम पूरी तरह चौपट हो गया। ग्राहकों के दर्जनों मोबाइल फोन भी मलबे में दब गए, जिससे लाखों का नुकसान हुआ।

तहसीलदार पर गंभीर आरोप

भरत खंडेल ने तहसीलदार मनोज गुप्ता पर आरोप लगाया है कि उन्होंने —

बिना नोटिस दिए घर तोड़ने की कार्रवाई कराई।

खसरा नंबर 455/6 और 455/7 के बीच का अंतर जानते हुए भी उनकी भूमि को विवादित बताया।

मौके पर आपत्ति दर्ज कराने की बजाय उन्हें पुलिस बल से हिरासत में लेकर चुप करा दिया।

रिहायसी भू-खण्ड खसरा नं. 455/7 रकबा 0.162हे. पर बने रिहायसी मकान, दुकान है लेकिन 455/6 के स्थान पर 455/7 को तोड़-फोड़कर नष्ट कर दिया गया है।

उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित न्याय दृष्टांतों की अनदेखी की।

न्यायालय और पुलिस पर सवाल

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि कनिष्ठ श्रेणी न्यायाधीश (घरघोड़ा) ने उनके द्वारा दायर स्थायी निषेधाज्ञा व स्वत्व संबंधी वाद को बिना उचित कारण निरस्त कर दिया। वहीं पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने से इंकार करते हुए इसे “हस्तक्षेप अयोग्य अपराध” बताकर टाल दिया।

आयोग और राज्यपाल को भेजी शिकायत

भरत खंडेल ने राज्यपाल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय एवं राज्य अनुसूचित जाति आयोग को शिकायत भेजी है। उन्होंने दोषी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी और अन्य अधिकारियों पर अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 तथा बी.एन.एस. 2023 की धाराओं में अपराध दर्ज करने की मांग की है। साथ ही मकान और दुकान ढहाए जाने से हुए नुकसान का मुआवज़ा और पुनर्वास की भी मांग की है।

अन्य जगह मकान तोड़ा गया

खंडेल का कहना व्यवहार न्यायधीस घरघोड़ा दामोदर प्रसाद चंद्रा द्वारा ग्राम घरघोड़ा स्थित 455/6 का कब्ज़ा हटाने का प्रयास किया गया था 14 जुलाई 2025 तहसीलदार के द्वारा न्यायालय कों दिये गये प्रतिवेदन में 455/6 नम्बर की भूमि रकबा 0.032 हेक्टर (8 डिसमिल भूमि ) जगरनाथ सिंह ठाकुर एवं भतीजे सुनील सिंह के कब्जे में पाई गयी ।फिर भी भरत खंडेल की भूमि कों दबाव पूर्वक बगैर पूर्व सूचना के मकान तोड़कर क्षति कार्य किया गया। फिलहाल भरत खंडेल और उनका पूरा परिवार न्याय की गुहार लगाते हुए खुले आसमान तले अनशन पर बैठा है। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी और आयोग इस गंभीर प्रकरण में तहसीलदार सहित दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

तहसीलदार का पक्ष

इस पूरे प्रकरण पर तहसीलदार मनोज गुप्ता तहसीलदार घरघोड़ा ने बताया कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुरूप की गई है।

  

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