दंड से न्याय की नाटक ने राज्योत्सव में बटोरी प्रशंसा

पुलिस विभाग के 30 अधिकारी ,कर्मचारियों ने किया अभिनय

मुख्यमंत्री ने की छत्तीसगढ़ पुलिस की रचनात्मक पहल की सराहना

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव 2025 में पुलिस विभाग द्वारा प्रस्तुत नाटक “दंड से न्याय की ओर” ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
नाटक का निर्देशन एसएसपी जशपुर शशि मोहन सिंह ने किया है, जबकि सहायक निर्देशन डॉ. आनंद पांडेय ने संभाला। यह नाटक प्रतिदिन राज्योत्सव के पुलिस पंडाल में मंचित किया जा रहा है और पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बन गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं नाटक का अवलोकन किया और इसकी विषयवस्तु व प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि – “ऐसी प्रस्तुतियाँ जनजागरण का प्रभावी माध्यम हैं और नए कानूनों को सरलता से समझाती हैं।”

न्यायिक प्रक्रिया की शानदार प्रस्तुति

पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा द्वारा तैयार यह नाटक भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए आपराधिक कानूनों पर आधारित है। इसमें एफआईआर से लेकर न्यायालय के अंतिम निर्णय तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया को मंच पर जीवंत रूप से दिखाया गया है।

विशेषता यह रही कि नाटक के सभी 30 कलाकार वास्तविक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी हैं। इसमें डिजिटल जांच प्रणाली, डीएनए टेस्ट, फिंगरप्रिंट और ई-साक्ष्य ऐप जैसी आधुनिक तकनीकों की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि नाटक को दर्शकों का भरपूर स्नेह मिल रहा है। लोग संवाद सत्रों में कह रहे हैं कि यह प्रस्तुति नए कानूनों को समझाने का सबसे सरल और रोचक माध्यम है।

इस नाट्य प्रस्तुति में डीआईजी प्रखर पांडेय, एआईजी विवेक शुक्ला, एएसपी वर्षा मिश्रा और डीएसपी डॉ. प्रमिला सहित सीआईडी टीम का विशेष योगदान रहा।

पुलिस मुख्यालय के सीआईडी शाखा के द्वारा यह नाटक तैयार कराया गया है, पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ अरूण देव गौतम की परिकल्पना एवं आईजी ध्रुव गुप्ता के द्वारा साकार किया गया है।

नाटक में कुल 10 सीन

नाटक की शुरूआत एक परिवार में डकैती एवं मर्डर की घटित घटना से शुरू होता है, जिनमें एफआईआर दर्ज होने से लेकर अदालत में अंतिम फैसले तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया को बेहद प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। इस प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि इसमें अभिनय करने वाले सभी 30 पात्र वास्तविक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी हैं। किसी ने थानेदार की भूमिका निभाई, तो कोई फॉरेंसिक अधिकारी, अधिवक्ता या न्यायाधीश के रूप में मंच पर नजर आया।

इस नाटक के माध्यम से छत्तीसगढ़ पुलिस ने यह साबित किया कि कानून की जानकारी केवल पुस्तकों या अदालतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज के हर वर्ग तक इसका प्रसार रचनात्मक माध्यमों से किया जा सकता है। “दंड से न्याय की ओर” जैसी प्रस्तुति ने यह संदेश दृढ़ता से दिया कि नया भारत न्याय, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रहा है।

ई-एफआईआर से लेकर न्याय तक सब तय अवधि में

नाटक की शुरूआत पुलिस कंट्रोल रूम में हत्या एवं डकैती की खबर मिलने से होती है, मिनटों में त्वरित कार्यवाही करते हुये एफआईआर दर्ज की जाती है, पुलिस दल मौके पर पहुंचता है, फारेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाये जाते हैं और हर कदम की वीडियोग्राफी की जाती है, यह सब नये कानून के तहत् होता है। 70 दिनों में पुलिस जाॅंच कर चालान प्रस्तुत कर देती है, 90 दिवस के भीतर न्यायालय फैसला करता है। अब पुलिस जांच को डिजिटल और वैज्ञानिक बनाने के लिए ई-साक्ष्य ऐप, सीसीटीएनएस (CCTNS) सिस्टम, एनएएफआईएस (NAFIS) और क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग कर रही है। इंस्पेक्टर किरण ठाकुर और एएसआई संतराम साहू के किरदारों के माध्यम से दिखाया गया कि तकनीक कैसे अपराध की जांच को पारदर्शी और न्याय प्रक्रिया को तेज बनाती है। इंस्पेक्टर किरण ठाकुर की भूमिका पुलिस मुख्यालय में पदस्थ ज्योति पाण्डेय, राजनादंगांव में पदस्थ स.उ.नि. संदीप देशमुख के द्वारा की गई भूमिका को दर्शकों का भरपूर स्नेह मिल रहा है।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि नए कानूनों का उद्देश्य केवल दंड नहीं, बल्कि न्याय को तीव्र, पारदर्शी और जनहितैशी बनाना है।

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