किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन की पहल
धमतरी, 11 अक्टूबर 2025।किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और नई फसल संभावनाओं की ओर बढ़ाने के उद्देश्य से धमतरी जिले में ऑयल पाम की खेती की शुरुआत की गई है। शुक्रवार को ग्राम डूमरपाली में किसान मोहन साहू के खेत में एक हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम के पौधों का रोपण किया गया। यह कार्य कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की देखरेख में और अम्मा ऑयल पाम कंपनी के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ।
जिला प्रशासन का मानना है कि यह फसल भविष्य में किसानों की आय में बड़ा बदलाव ला सकती है।
ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए अम्मा ऑयल पाम प्लांटेशन लिमिटेड, हैदराबाद को जिले में अधिकृत किया गया है, जो किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी से लेकर उत्पाद की खरीदी तक में मदद करेगी।
अब तक लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 1700 से अधिक पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
सीखने का अवसर मिला किसानों को
पिछले माह जिला प्रशासन ने किसानों को ऑयल पाम की आधुनिक खेती से परिचित कराने के लिए एक अध्ययन भ्रमण दल भेजा था।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में गए इस दल में आठ गांवों के 30 किसान, तीन कृषि विस्तार अधिकारी और दो उद्यान अधिकारी शामिल थे। उन्होंने महासमुंद जिले के भलेसर गांव में जाकर ऑयल पाम की सफल खेती के तरीके देखे और किसानों से अनुभव साझा किए।
300 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी खेती
जिले को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (ऑयल पाम) के तहत वर्ष 2025-26 के लिए 300 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य मिला है।
योजना के अंतर्गत किसानों को पौधारोपण, फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई, रखरखाव और अंतरवर्ती फसल पर अनुदान दिया जाएगा।
इसके साथ ही दो हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शन हेतु नलकूप और पंप सेट पर भी विशेष सहायता उपलब्ध होगी।
प्रत्येक पात्र किसान को अधिकतम ₹2.51 लाख तक का अनुदान मिल सकेगा।
लंबे समय तक लाभदायक फसल
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि ऑयल पाम का पौधा लगाने के तीन से चार साल बाद फल देना शुरू करता है और लगभग 30 वर्षों तक लगातार उत्पादन देता रहता है।
प्रति हेक्टेयर औसतन 20 से 25 टन उत्पादन संभव है, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य करीब ₹1700 प्रति क्विंटल है।
यह फसल कम उपजाऊ या पथरीली जमीन पर भी आसानी से उगाई जा सकती है और जंगली या पालतू पशुओं से सुरक्षित रहती है।
कलेक्टर ने किसानों से किया आह्वान
कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ऐसी फसलों को अपनाएँ, जिनसे कम लागत में अधिक लाभ मिल सके।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन किसानों को हर स्तर पर तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन देगा ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

