रायपुर। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर गुरु परिवार एवं भक्तों ने श्री शंकराचार्य आश्रम, बोरियाकला में महासरस्वती पूजन किया गया। इसके उपरांत परम पूज्य १००८ यतिप्रवर दण्डी स्वामी डां इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। राकेश अग्रवाल ने बताया माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी सारस्वत नवरात्रि कहलाती है और बसंत पंचमी इसका सर्वोत्तम पर्व है, ज्ञान की इच्छा रखने वाले इस नवरात्रि में महा सरस्वती जी की उपासना करते हैं। बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान विद्या एवं कला की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की उपासना का सर्वोत्तम पर्व है। उन्होंने बताया नवरात्रि चार प्रकार की होती है दो गुप्त एवं दो प्रकट। गुप्त नवरात्रि में की गई साधना दिव्य अनुभूति प्राप्त कराती है। इस नवरात्रि की पंचमी अर्थात बसंत पंचमी विशेष इसलिए भी है क्योंकि इसमें बालकों का विद्यारंभ भी होता है लेखनी एवं पुस्तक का पूजन होता है जो सरस्वती का प्रतीक है।
इसअवसर पर भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुन्दरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का विशेष पूजन , श्री यंत्र पूजन,गुलाब पुष्पों से सहस्त्रार्चन, रुद्राभिषेक एवं लेखनी-पुस्तक पूजन किया गया।
इस अवसर पर आचार्य धर्मेंद्र शास्त्री, बृजमोहन अग्रवाल , मोतीलाल साहू , रविंद्र चौबे, डीपी तिवारी , एम एल पांडे , ज्ञानेश शर्मा , अनिल पांडे अनिल अग्रवाल गोविंद उपाध्याय लक्ष्मी नारायण धूतजी आदि भक्तगण, वैदिक विद्वान एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

