रायपुर (News27) 04.06.2024 । रायपुर मारुति मंगलम भवन में संत निरंकारी मिशन की ब्रांच रायपुर में 30 वाँ निरंकारी बाल संत समागम का आयोजन किया गया
जिसमे 5 वर्ष से 15 वर्ष तक के लगभग 180 बच्चों ने भाग लिया और इस बाल समागम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य नाटिका , कविता , क़व्वाली , भांगड़ा, सुआ नृत्य , हिन्दी , सिंधी एवं इंगलिश स्पीच और अन्य विधाओं से भक्ति का संदेश दिया।
राजनांदगाँव से आयी बहन जिया गुरबख्शानी जी ने निरंकारी सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का सत्य का संदेश दिया और कहा समाज में लोग कहते हैं कि बचपन में ही क्यों भक्ति की ओर बच्चों को जोड़ा जाये तो संत कहते है कि बचपन गीली मिट्टी के समान होता हैं उन्हें जो भी शिक्षा संस्कार बालपन में मिलते हैं बड़े होने पर उसका व्यक्तित्व वैसा ही बन जाता है इसलिए बचपन में बच्चों को सत्संग से जोड़ा जाये।
बच्चों को बचपन में माता पिता ही उन्हें झूठ बोलना सिखाते है। द्वार पर मिलने आये परिचित को उनका पिता बच्चे से कहता कि उनसे कहो पापा घर पर नहीं हैं।उन्हें ज़िद्दी बनाते है। उन्हें ऐसे प्यार करते हैं कि उनकी सभी जायज़ नाजायज़ बातें माता पिता मान लेते है। और बच्चा जब बड़ा हो जाता है तो माता पिता की बात नहीं सुनता फिर वो कहते है कि जमाना कितना ख़राब हो गया है।स्वयं द्वारा बच्चों के लालन पालन में की गई ग़लतियाँ उन्हें याद नहीं रहती।इसलिए बच्चों को अच्छे संस्कार देने के लिए उन्हें बचपन से ही सत्संग से जोड़ना ज़रूरी है।
बाल संगत की इंचार्ज बहन हर्षा पंजवानी जी ने सभी बच्चों को प्रैक्टिस के लिए सत्संग भवन भेजे जाने पर उनके परिवार को धन्यवाद दिया जो उन्होंने इस भीषण गर्मी की परवाह नहीं की और नन्हे बच्चों को लेकर आये।
रायपुर ब्रांच के ज़ोनल इंचार्ज जी ने अपने वचनों में कहा कि जब हम छोटे थे तो हमारा मन सत्संग जाने का नहीं होता था किंतु पिताजी लेकर जाते थे और कहते थे कि एक दिन तुम इस दिन को याद करोगे और आज उनकी कही बात सच में याद आती है। उन्होंने सत्संग ले जाकर जो संस्कार दिए उसी का परिणाम है ये कि आज दास समाज से इज़्ज़त और प्यार पा रहा है।
मीडिया प्रभारी प्रेम सिंह धामी ने बताया कि सत्संग में लगभग 1300 संतों भक्तों ने भाग लिया। सभी के लिए लंगर पानी की भी व्यवस्था की गई थी।
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