सामान्य बंदियों के साथ भेदभाव

रायपुर। सेंट्रल जेल अब विवादों में है, जहाँ कुछ बंदियों को फाइव स्टार जैसी सुविधाएँ मिल रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि बैरक नंबर 15 का बंदी राशिद अली उर्फ राजा बैझड़ जिम करता और सेल्फी लेता नजर आया। वीडियो में उसके हाथ में मोबाइल था, जबकि जेल में मोबाइल का उपयोग और प्रवेश प्रतिबंधित है। यह घटना जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही और नियमों की अवहेलना को उजागर करती है।
जेल में विचाराधीन बंदी राशिद अली के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस, मारपीट और जान से मारने की धमकी के मामले दर्ज हैं। वीडियो में दिख रहा है कि जेल में भी वह अपने दबदबे का प्रदर्शन कर रहा है। सोशल मीडिया पर इसे वरिष्ठ पत्रकार मुकेश सिंह ने साझा किया और जेल प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाया।
वायरल वीडियो और तस्वीरों से साफ है कि रायपुर सेंट्रल जेल में कुछ बंदियों को मोबाइल, जिम और अन्य विशेष सुविधाएँ दी जा रही हैं। इन सुविधाओं के लिए अक्सर बंदियों को या उनके परिजनों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। वहीं, सामान्य बंदियों को इस तरह की सुविधा नहीं मिलती, जिससे जेल के भीतर असंतोष और वर्ग संघर्ष की स्थिति बन रही है।
साथ ही, रायपुर और अन्य जेलों में बंदियों की संदेहजनक मौत और आत्महत्याओं के मामले बढ़ रहे हैं। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि जेल प्रशासन अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ता है। जेल के भीतर और बाहर कुछ अधिकारियों के लिए यह गैर कानूनी कमाई का साधन बन गया है। बंदियों की मुलाकात, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुएँ भी अक्सर रिश्वत के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं।
विशेष ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह है कि कई VIP बंदी न्यायिक हिरासत में हैं, जिनमें महादेव एप्प सट्टा घोटाले के आरोपी, 32,00 करोड़ के शराब घोटाले के मुख्य आरोपी कवासी लखमा, अनवर ढेबर, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य उर्फ बिट्टू शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि इन्हें गैर कानूनी रूप से विशेष सुविधाएँ दी जा रही हैं।
जेल प्रशासन की चुप्पी और नियमों की अवहेलना ने रायपुर सेंट्रल जेल को विवादों का केंद्र बना दिया है। सामाजिक असंतोष, बंदियों के बीच असमान सुविधाएँ और संदेहजनक घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यहाँ सामान्य बंदियों और VIP बंदियों के बीच भेदभाव गहरा रहा है।

