रायपुर (News27) 05.06.2024 । लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे जनमन का ऐसा जनादेश है, जो वास्तविक लोकतंत्र का सशक्त उदाहरण बन गया है। भारतवर्ष में आज भी लोकतंत्र का स्तंभ बेहद मजबूत है। लोकसभा चुनाव में जनता ने जता दिया कि उसे समझना धुरन्धरों के भी वश की बात नहीं, परन्तु किसे राजा बनाना है यह जनता जरूर समझती है। हालंकि तीसरी बार भी मोदी सरकार बन रही है परन्तु विपक्ष के मजबूती ने सत्तादल के समीकरण को असंतुलित कर दिया है। यूपी में बड़े फेरबदल से राजनीतिक विश्लेषेकों तक को मूक कर दिया तो वहीं अयोध्या जैसी सीट पर भाजपा की हार ने विशेषज्ञों के समझ के पांव से जमीन ही खिसका दी। हालांकि दक्षिण भारत में विस्तार से कुछ मरहम जरूर लगा। एनडीए का आंकड़ा भले ही सरकार बनाने लायक बहुमत से आगे निकल गया हो, भाजपा भले ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन आंकडे़ बता रहे हैं कि जातीय गोलबंदी और मुस्लिम लामबंदी हिंदुत्व पर भारी पड़ी। मोदी की तीसरी बार सरकार बनने से संविधान और आरक्षण पर खतरे का विपक्ष का शोर भाजपा के लाभार्थी मतदाताओं के समूहों तथा सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास के नारे पर भारी पड़ा। अयोध्या में राममंदिर की प्राण.प्रतिष्ठा के बावजूद वहां भाजपा की हार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। विपक्ष ने मोदी में आने वाले तानाशाह की छबि जनता के बीच बनाने में सफल रहे तो वहीं भाजपा ने इन मुद्दों को हल्के में लिया, जिसका परिणाम चुनावी नतीजों के रूप सामने आया। अब जरूरत है कि भाजपा बनाम एनडीए जनता के नब्ज को समझे हाल के चुनाव परिणाम पर गहन मंथन करें तभी 2029 के लिए संभावनाएं कायम रह सकेगी।
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