नारायण जन्म लेते हैं और मृत्यु पर विजय प्राप्त होते हैं, आज हनुमान जन्मोत्सव को जयंती नहीं उनके जन्म उत्सव के रूप में मनायें

रायपुर (News27) 23.04.2024 ।आज रामभक्त हनुमान जन्मोत्सव है। चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और मंगलवार का दिन है। पूर्णिमा तिथि आज पूरा दिन, पूरी रात पार कर के कल सुबह 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। आज पूरा दिन पार कर भोर 4 बजकर 56 मिनट तक वज्र योग रहेगा। साथ ही आज रात 10 बजकर 32 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा आज स्नानदान व्रत आदि की चैत्री पूर्णिमा है। आज सुबह 8 बजकर 39 मिनट पर मंगल मीन राशि मे प्रवेश करेंगे।इस दौरान 12 राशियों पर इसका भिन्न-भिन्न प्रभाव होगा। किसी राशि में विपरीत प्रभाव को धर्म-कर्म व पूजापाठ कर इसके दुष्प्रभाव को कम भी किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक से अधिक दान-पुण्य करने एवं जनसेवा व प्रभुसेवा से भी दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
हनुमान जयंती नहीं हनुमान जन्मोत्सव कहें –
भगवान श्रीराम के दास सेवक के रूप हनुमान जी का नाम सर्वप्रथम आता है। हनुमान जी को भगवान श्रीरामचन्द्र की विशेष अनुकंपा प्राप्त है, इसलिए संकटग्रस्त या किसी मुसीबत में हनुमान जी को याद करने मात्र से बड़ी विपदा या समस्याएं जड़ से खत्म हो जाती है। इस दिवस को वर्तमान में अक्सर हनुमान जयंती के रूप में लोग जानते हैं परन्तु वास्तव में इस पावन पुनीत दिन को हनुमान जयंती नहीं अपितु हनुमान जन्मोत्सव कहा जाना उचित है, क्योंकि जयंती का अर्थ जो जन्म लेकर मरण को प्राप्त हो, जबकि भगवान श्रीरामचन्द्र से अमरत्व को प्राप्त कर चुके व्रज के समान बलवान बजरंगबली अमर हैं, ऐसे में उन्हें जन्मकाल की तिथि को जयंती कहना पूर्णतः अनुचित है और हनुमान जन्मोत्सव कहा जाना ही सर्वथा उचित है। इसी तरह सनातन धर्म के अन्य देवी-देवताओं का जन्मोत्सव को जयंती के रूप में ना मनाकर जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। नर की जयंती हो सकती है परन्तु नारायण जन्म लेते हैं पर मृत्यु को विजय प्राप्त होते हैं, उनकी मृत्यु नहीं होती वे इच्छा मरण के अधीन होते हैं, जैसे भगवान कृष्ण को एक बहेलिये ने अपने तीर से उनके श्रीचरणों पर वार किया, जो भगवान श्रीकृष्ण के निर्वाण का कारण बना, वे मृत्यु को प्राप्त नहीं हुए बल्कि मृत्यु को उन्होंने स्वीकारा, भगवान श्री के इच्छा के बिना मृत्यु भी उन्हें प्राप्त नहीं होती, वे ब्रम्हांड के रहने तक रहते हैं, क्योंकि भगवान का अर्थ ही प्रकृति है और प्रकृति चर-अचर काल से विद्मान है और विद्मान रहेगा। ऐसे में उनके जन्म को भी जयंती कहना, उनका मान कम करने जैसा है। अतः आज हनुमान जन्मोत्सव को जयंती नहीं बल्कि जन्मोत्सव के रूप में ही मनाये।
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