जल, जंगल, पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति हमारी अकर्मण्यता घातक: जनसेवक अरूण जोशी

समाज के लिए प्रेरक हैं वृक्ष मित्र देवचरण साहू

रायपुर (News27) 10.06.2024 । अरूण जोशी जनसेवक द्वारा दिनांक 9 जून को आयोजित वृक्ष पूजन अभियान के तहत सभी को एक-एक वृक्ष लगाने, पर्यावरण को बचाने हेतु लोगों में जनजागरूकता लाने का व्यापक कार्यक्रम ग्राम बड़े औरी, तहसील पाटन जिला दुर्ग में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में वृक्ष पूजन कर पौधारोपण किया गया जिसमें सभी का जनसहयोग शामिल रहा। जनसेवक एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित अरूण जोशी ने कहा कि पश्चिम संस्कृति के अधीन होते हमारे युवा वेलेंटाइन-डे तो मना लेते हैं, परन्तु वे भविष्य के लिए अतिआवश्यक पर्यावरण की सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति अकर्मण्य होते जा रहे हैं, कई लोग तो जानते हुए भी विनाश की ओर अग्रसर पर्यावरण की भयावहता को नजरअंदाज कर रहे है, जो कि हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए घातक है। अरूण जोषी ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा एक पौधा रोप कर उसे वृक्ष के रूप पल्लवित करना, जल का बचत करना भी मानवीय गुणों में से एक है, मनुष्य होकर भी यदि हम जल, जंगल को बचा लिये तो यह सेवा भी देवतुल्य मानवीय कर्म के अधीन महान कर्मों में से एक है। उन्होंने पौधरोपण करते हुए जनमानस से अपील की कि सभी एक पेड़ लगाएं और उसे अपने घर की सदस्य की तरह पोशित करें, क्योंकि यह ना केवल हमें सुरक्षित करेगी बल्कि हमारे आने वाली पीढ़ी को सरंक्षित करेगी। इस दौरान उपस्थित अतिथियों ने भी अपने पर्यावरण सुरक्षा को लेकर सारगर्भित उद्बोधन दिए। कार्यक्रम में मीडिया, शिक्षा, चिकित्सा, कला सहित विभिन्न विधा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुरोधाओं को प्रशस्ति पत्र देकर उनका सम्मान किया गया।
पर्यावरण प्रेमी देवचरण साहू हैं वृक्ष मित्र
ग्राम बड़ें औरी निवासी देवचरण साहू की उम्र पेंड़ लगाते बीत गया। अपने निवास स्थान में ही सैंकड़ों पेंड़ खड़ा करने वाले देवचरण गांव में भी हजारों पेंड़ लगाने वाले सच्चे वृक्ष मित्र हैं।़ छोटे से परिवार में परिवार का प्रत्येक सदस्य वृक्ष लगाने, उन्हें संरक्षित करने के लिए समर्पित है। एक पेंड़ हमें टनों आॅक्सीजन देती है, वैसे ही देवचरण का यह कार्य हमें कम से कम एक वृक्ष लगाने की प्रेरणा तो जरूर देती है, जो मानव जीवन को विनाश से बचाने के लिए बेहद अहम है। देवचरण पौधरोपण कर उसे पेंड़ बनाने अपने जीवन का ध्येय बना चुके हैं। उनके द्वारा रोप पौधे आज पेंड़ों के रूप में सीना तान कर खड़ें लहलहाते ऐसा प्रतीत होते हैं जैसे देवचरण से अपने अंतस के गहन रिश्ते को बता रहे हो। हम ग्लोबल वार्मिंग की बाते बहुत करते हैं, परन्तु उसके प्रति गंभीर कभी नहीं हुए, ऐसे समय में देवचरण साहू हम सभी के लिए प्रेरक साबित हो सकते हैं, ये वहीं देवचरण साहू है जिन पर सिर्फ इसलिए प्राणघातक हमले हुए कि देवचरण पेंड़ लगाते थे और विरोधी पेंड़ काटना चाहते थे। अब हमें चिंतन करना है कि हम पेंड़ कटने दें या लगायें।
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