नर्स ही डॉक्टर, नर्स ही दवा देने वाली, विसंगतियों के मकड़जाल में अस्पताल
जगदलपुर (News27) 27.06.2024 । एक कहावत है दिया तले अंधेरा …पर दिया तले अंधेरे का दर्द आप जो रोशनी में हैं तो नहीं समझ पाएंगे …उस अंधेरे की पीड़ा तो दिये को ही पता होगा जिससे वह गुजर रहा…नानगुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी उस समय कुछ इसी तरह के दर्द से गुजरता होगा ..जब जीवन को सहेजने और सेहद बाँटने वाले अस्पताल को एक ही नर्स के सहारे अगर छोड़ दिया जाता है ..? लोगों ने बताया कि अक्सर छुट्टी के दिन में एक ही नर्स पूरे समय तक होती है,केवल यही नहीं अन्य दिन भी इसी तरह नर्सो के सहारे अस्पताल को छोड़ दिया जाता है पर यहां खामोश तीसरी आंखे लगी है जो सब दर्ज करता रहता है परंतु जिम्मेदार आँख वाले तो कठिन वक्त में कहां होते है यह कौन बतायेगा ?
विदित हो कि शासकीय छुट्टी के दिन शिप्ट नुसार ड्यूटी लगता है,जिसमें तीनों शिप्ट में एक एक नर्स तो ड्यूटी में होती है परंतु कभी जरूरत के अनुसार डॉक्टर नहीं होते वहीं अस्पताल में इसी तरह नर्सो के साथ किसी अन्य स्टाफ की भी आवश्यकतानुसार ड्यूटी नहीं लगती। अस्पताल के जिम्मेदार एक नर्स के सहारे उक्त अस्पताल और मरीजों को छोड़ देते हैं जिससे ना केवल उक्त डियूटी दौरान उक्त नर्स को बल्कि मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसे सवेदनशील होकर समझा जा सकता है । जगदलपुर जिला मुख्यालय से लगभग 20 -21 किलोमीटर दूर स्थित यह अस्पताल रूलर एरिया में आता है ।
इवनिंग डियूटी में इस तरह की परिस्थितियों के बीच अकेली कार्य कर रही नर्स की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी के साथ आपात परिस्थितियों में किसी मरीज को लेकर ऐसे में क्या होगा जैसे कई गम्भीर सवाल है जिसका जवाब ढूंढ़ना
निराकरण के साथ जरुरी है जरूरत इस बात की भी है कि अपनी कमियों को दूर कर समय रहते अपनी विशेषताओं के साथ उपलब्ध सुविधाओं को लेकर नया आयाम गढ़े।
पर जनता को तो यह उम्मीद है कि समय रहते अस्पताल में आ रही इस समस्या और इस कठिन परिस्थितियों का हल कर लिया जाएगा फिर अस्पताल अपने उद्देश्य और अपनी मौजूदगी को लेकर पूर्ण अर्थों में अपनी भूमिका को निभा सकेगा। -बस्तर ब्यूरो, नवीन श्रीवास्तव।
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