जशपुर जिले के इचकेला में मुक्तिधाम नहीं होने के कारण अधजली हो रहीं लाशें…

हालत देखकर आपके खड़े हो जाएंगे रोंगटे

जशपुर. छत्तीसगढ़ में एक ऐसा अजीबों गांव हैं जहां एक भी मुक्ति धाम नहीं हैं. गांव में सड़क, लाईट, नालियां बनी जिसे एक दौर में आदर्श ग्राम घोषित भी किया पर अपसोस की यहां एक भी मुक्तिधाम नहीं हैं. मुक्तिधाम नहीं होने के कारण शव खुले में जलाया जा रहा हैं बारिश में लाशें अधजली हो रहीं हैं.जिसके हालत देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. दरअसल आजादी के वर्षो बाद भी जिला मुख्यालय से नजदीक इचकेला पंचायत के सभी गांवों में अब तक एक भी मुक्तिधाम नहीं बनाया गया हैं.यहां ग्रामीण मुक्तिधाम के लिए तरस रहें.पर प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधि की अनदेखी के कारण आप सोच ही सकते हैं गांव की क्या हालत हैं. गांव की आबादी करीबन 4000 के आसपास हैं. गांव में जागरूक पढ़े लिखें और नौकरी करने वाले लोग हैं लेकिन इन सबके बाद गांव में एक भी मुक्ति नहीं बनी है . ग्रामीणों ने पूर्व विधायकों समेत आला नेताओं को अवगत कराया है जिस पर उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई बल्कि आश्वास देकर मामला शांत करा दिया गया . ग्रामीणों का कहना हैं कि मुक्तिधाम नहीं होने कि वज़ह से बारिश में लकड़ीयां कच्ची हो जाती हैं जिससे शव अधजली हो जाती हैं. कई बार तों लाशें भी नहीं जलती हैं जिसे बमुश्किल जलाया जाता हैं या फिर शव को जमीन में दफन कर दिया जाता हैं. आप सोच सकते हैं मरने के बाद ऐसी हालत में मृतक के परिवार पर क्या गुजरती होंगी.

अंतिम विदाई में भी सम्मान नहीं

जीवन और मृत्यु एक चक्र हैं लेकिन मरणो उपरांत मृतक को सम्मान विदाई देना चाहिए.लेकिन बारिश के दिनों में लकड़ी गीले में शव अधजला होने से कई तरह के भाव जागृत हो रहें हैं.दिलीप सिंह ने कहा कि पहले तों मरणों उपरांत उन्हें दफना दिया जाता था लेकिन मरघट का जगह अब घिरते जा रहा है.इसलिए प्रायः लोग दाहसंस्कार कर रहें है.
ज्ञात हो की शासन ऐसे मामलों में त्वरित कार्यवाही या सुविधा प्रदान करतीं हैं लेकिन इन सबके बीच में जिम्मेदार लोग क्यों अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल हैं.

अनियमिता कि भेंट चढ़ा
,बनते बनते रह गया मुक्तिधाम

आरोप हैं कि सरपंच, सचिव की भ्रष्टाचार व अनियमिता की भेंट मुक्तिधाम चढ़ गया. पूर्व में सरपंच, सचिव कि भ्रष्टाचार व अनियमिता कि वजह से मुक्तिधाम का निर्माण कार्य अधूरा रह गया . सरपंच सचिव ने मुक्तिधाम का अधूरा काम कराकर कागजों में पूरा काम बताकर पूरा पैसा गबन कर दिया जिससे मुक्तिधाम बनते बनते रह गया हैं. विदित हो कि ग्राम पंचायत इचकेला, रजौटी गांव का मरघट रजौटी (चार टोली) में है.किसी के मरणोउपरांत शव के अंतिम संस्कार के लिए रजौटी के चारटोली ग्राम में लाया जाता हैं. भुनेश्वर सिंह ने बताया कि पूर्व में मुक्तिधाम का अधूरा निर्माण कार्य बेकार हो गया.मुक्तिधाम निर्माण के लिए पुनः सरपंच सचिव को अवगत कराया गया हैं इसके आलावा ग्रामीणों ने मुक्तिधाम निर्माण के लिए विधायक रायमुनी भगत को ज्ञापन सौंपा हैं.

अधूरा काम कराकर कागजों में कार्य पूरा बताया

आरोप है कि सरपंच सचिव ने मुक्तिधाम का अधूरा कार्य कराकर कागजों में पुरा बताया हैं और पैसे हड़प लिए इतना ही नहीं एक मुक्तिधाम का निर्माण कराया नहीं गया वहीं उन्होंने एक पड़ाव बना दिए जिससे दोनों काम अधूरे हो गए. यदि मुक्तिधाम ही बनता तों उतने बजट में एक मुक्तिधाम तैयार हो जाते लेकिन सचिव, सरपंच का दोहरा लाभ कमाने के चक्कर में जनहित और संवेदनशील मामलों को अनदेखा कर दिया. हालांकि अब सरपंच सचिव भी स्वर्ग सीधार गए.लेकिन उनके करनी आज भी लोगों को पीड़ा दे रहीं. वहीं ग्राम इचकेला में मुक्तिधाम के लिए तरस रहें. ग्रामीणों ने विधायक रायमुनी भगत को मुक्तिधाम निर्माण के लिए ज्ञापन दिया हैं जिस पर उन्होंने आश्वासन देकर ग्रामीणों की पीड़ा पर मलहम जरूर लगाया हैं. बरहाल इन सबके बीच देखने वाली बात हैं की वह लोगों की समस्या कब तड़ीपार करतीं हैं.

जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी
लोकहित भगत जशपुर

मुक्तिधाम निर्माण के लिए प्रस्ताव लाये बजट स्वीकृत कि जाएंगी.

सरपंच
जीरामुनि तिर्की
मुक्तिधाम का अधूरा निर्माण मेरे कार्यकाल के दौरान नहीं हुआ हैं, मुक्तिधाम निर्माण के लिए मैं प्रस्ताव पारित कर रहीं.

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