सादरी और कुडुख बोली में बनी फ़िल्म “झरियो” यु टुब पर…

राज्योत्सव में फिल्म “झरियो द अनटोल्ड स्टोरी” देखेंगे जशपुरवासी

जशपुर नगर। छत्तीसगढ़ में उरांव जनजाति कि सादरी और कुडुख बोली में स्थानीय शार्ट फ़िल्म झरियो कि शूटिंग जशपुर कि खूबसूरत वादियों में की गई है। यह फ़िल्म सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ सामाजिक जागरुकता लाने के उद्देश्य से प्रेरित है। इस फिल्म की निर्माता ऐलिस स्टेला एव लेखिका, निर्देशिका एवं संगीतकार सरोज संगीता भोई हैं। छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के मौके पर फिल्म “झरियो द अनटोल्ड स्टोरी” कि प्रस्तुति बहुत ही प्रेरणादायक है। फ़िल्म की कहानी झरियो नामक एक महिला पर आधारित है। अंधविश्वास के कारण ग्रामीण उसे डायन बुलाते थे, जिसे गांव से बाहर कर दिया गया था। जिसके कारण वह जंगलों में रहती थी। जब भी ग्रामीण लकड़िया चुनने जंगल जाते उसे देखकर रास्ता बदल लेते थे। गांव में कोई भी घटना घटता तो सारे आरोप झरियो पर ही लगाएं जाते, जिससे वह काफी परेशान थी। जिसका कोई साथ नहीं दे रहा था, और कुछ दिनों बाद उसकी तबियत खराब हो गई. एक पत्रकार ने कुछ दिन पुर्व झरियों पर समाचार प्रकाशित किया था। जब वह गांव में दुबारा मिलने आया तो उसने देखा कि गांव के सरपंच व स्थानीय लोग उसे डायन कहने लगे हैं। इसके बाद वह झरियों से मिलने जंगल चला गया जहां आवाज सुनकर महिलाएं डर रहीं थीं। उनको ऐसा लगा जैसे यह झरियो कर रहीं है। उसी दौरान जब पत्रकार झरियो से मिला तभी झरियो ने रोकर अपनी व्यस्था सुनाई। तब पत्रकार उसे लेकर गांव में पहुंचा तो ग्रामीण उसे डायन कहकर बुलाने लगे। पत्रकार ने ग्रामीणों को समझाया कि डायन जैसा कुछ नहीं होता है, बताया कि बैगा गुनिया व अंधविश्वास के चक्कर में मत पड़े। किसी को डायन कहने पर कड़ी सजा का प्रावधान है, ऐसा कहने पर उनको जेल भी जाना पड़ सकता है।

स्थानीय कलाकारों कों एक्टिंग का दिया मौका

जिले में फिल्मों के प्रति युवाओं में काफी दीवानगी है। हर कोई सोशल मीडिया मे अपना टेलेंट दिखा रहें हैं। जिसे देखते हुए ऐलिस स्टेला ने अपने शार्ट फ़िल्म में उभरते हुए स्थानीय कलाकारों को झरियों में एक्टिंग का मौका दिया हैं। उन्होंने नवोदित कलाकारों को फ़िल्म कि स्टोरी सुनाकर अभिनय कि बारीकीयों को समझाया। कलाकारों ने एक्टिंग के हाव भाव को समझकर फ़िल्म में शानदार एक्टिंग कि प्रस्तुति दी है. ज्ञात हो कि जशपुर जिले मे लघु कला सिनेमा (आर्ट शॉर्ट फिल्म) स्थानीय बोली कुडुख एवं सादरी में पहली बार प्रदर्शित हुआ है। जिसमे अपनी प्रतिभा एवं लगन के दम पर अपने स्व० पिता के आर्शिवाद स्वरुप रोबिनस नेस्ट प्रोडक्शन की शुरु‌आत की है। “अरुणा द राइजिंग गर्ल” उनकी पहली शार्ट फिल्म थी जो यू ट्यूब पर आ चुकी है जो उरांव जनजाति की बोली कुडुख एव स्थानीय बोली सादरी पर बनी है। सरोज संगीता बोई ने कहा कि स्थानीय भाषाओं में फिल्म बनाना और इसके माध्यम से सामाजिक जागरुकता लाना हमारे लिए गर्व की बात है।

जशपुर कि हसीन वादियों में हुई शूटिंग

जशपुर जिला वनाच्छादित इलाका है, जहां पहाड़, जंगलों के आलावा पर्यटन के काफी बेहतरीन दृश्य हैं। यहां प्राकृतिक सुंदरता की भरमार हैं। शॉट मूवी में गांव के सीन शहर के नजदीक स्थित सारुडीह और बरटोली से लिए गए हैं। झरियो द अनटोल्ड स्टोरी शार्ट फ़िल्म की स्क्रिप्ट लिखने में संगीतकार सरोज संगीता भोई को तीन महीने लगे। जिसकी शूटिंग जशपुर कि हसीन वादियों और ग्रामीण दृश्य पर आधारित है। जिसकी शूटिंग में एक महीने लग गए। झरियो द अनटोल्ड स्टोरी शार्ट फ़िल्म युटुब पर उपलब्ध है, जिसे काफी पसंद किया जा रहा है।

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