राज्य और केंद्र सरकार मिलकर पौधरोपण, सिंचाई, तकनीकी मार्गदर्शन और सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं: कलेक्टर जन्मेजय
जांजगीर-चांपा, 9 सितम्बर 2025।जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम सोंठी में कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने रविवार को ऑयल पाम की खेती का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों से चर्चा कर खेती के फायदे बताए और कहा कि ऑयल पाम फसल किसानों के लिए दीर्घकालिक और स्थायी आय का मजबूत साधन बन सकती है।
कलेक्टर ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर पौधरोपण, सिंचाई, तकनीकी मार्गदर्शन और सब्सिडी उपलब्ध करा रही हैं। शुरुआती वर्षों में किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए अंतरवर्ती फसलों की खेती पर भी सहायता दी जा रही है।
अभियान के रूप में आगे बढ़ेगी खेती
कलेक्टर महोबे ने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि जिले में ऑयल पाम की खेती को विशेष अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने उद्यानिकी और कृषि विभाग को निर्देश दिए कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को भी आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाए और प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए।
अधिकारी और किसान रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि ललित मोहन भगत, सहायक संचालक उद्यानिकी श्रीमती रंजना मखीजा, कृषक पुरुषोत्तम शर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी खेमा दस महंत, चूड़ामणि राठौड़, धर्मपाल राठौड़ सहित कृषि विभाग के अधिकारी, स्थानीय किसान और महिला समूह की सदस्य मौजूद रहे।
500 हेक्टेयर का लक्ष्य
सहायक संचालक उद्यानिकी ने जानकारी दी कि जिले में ऑयल पाम खेती का 500 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 29 हजार रुपये मूल्य के 143 पौधे नि:शुल्क दिए जा रहे हैं। पौधरोपण, फेंसिंग, सिंचाई और अंतरवर्ती फसलों की लागत करीब चार लाख रुपये आती है, जिस पर केंद्र सरकार 1.30 लाख और राज्य सरकार 1.29 लाख रुपये का अनुदान दे रही है। इसके अलावा अंतरवर्ती फसल, बोरवेल, पंप सेट, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर भी सब्सिडी का प्रावधान है।
किसानों के लिए बड़ी उम्मीद
ऑयल पाम की फसल तीसरे साल से उत्पादन देना शुरू करती है और 25–30 साल तक लगातार उपज देती है। एक हेक्टेयर से हर साल करीब 20 टन उपज प्राप्त होती है, जिससे किसान को ढाई से तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय संभव है।

