नवभारत साक्षरता अभियान शिक्षा लेकर आया उजियारा

उल्लास नवभारत साक्षरता परीक्षा में 16 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों ने लिखी परीक्षा

बलरामपुर। कहते हैं पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती। जिन लोगों ने किसी कारणवश बचपन में स्कूल जाने का अवसर नहीं पाया, उनके लिए नवभारत साक्षरता अभियान शिक्षा का उजियारा लेकर आया है। इसी क्रम में जिला प्रशासन और जिला शिक्षा विभाग के निर्देशन में रविवार को उल्लास नवभारत साक्षरता परीक्षा जिले के विभिन्न शासकीय स्कूलों में आयोजित की गई।

परीक्षा सुबह 9:50 बजे से शाम 5 बजे तक चली। इस दौरान लोग अपने काम-धंधे छोड़कर उत्साहपूर्वक परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा केंद्रों में पर्यवेक्षण और परीक्षार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव स्वयं बलरामपुर, कुसमी विकासखंड के अलावा कई केंद्रों का निरीक्षण करने पहुंचे।

जनजातीय समुदाय की उल्लेखनीय भागीदारी

बलरामपुर जिले में आयोजित इस परीक्षा में विशेष जनजाति पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह परीक्षा विशेष रूप से उन लोगों के लिए रखी गई थी, जो आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियों के कारण नियमित शिक्षा से वंचित रह गए थे।

70 वर्ष तक की महिलाओं ने भी लिखी परीक्षा

इस परीक्षा में 16 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक के लोग शामिल होकर शिक्षा के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय दिया।
डीईओ मनीराम यादव ने कहा कि हमारे जीवन में शिक्षा का अत्यधिक महत्व है। साक्षरता न केवल व्यक्ति का ज्ञान बढ़ाती है, बल्कि उसके व्यक्तित्व, सोच और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक बदलाव लाती है।

साक्षरता परीक्षा के लाभ

डीईओ ने बताया कि लोग साक्षरता परीक्षा को हल्के में न लें। इसकी उपयोगिता काफी महत्वपूर्ण है। कई लोग ऐसे हैं जो साक्षरता परीक्षा उत्तीर्ण कर आगे चलकर अच्छी नौकरियों में हैं।

परीक्षार्थियों को परीक्षा के बाद अंकसूची (मार्कशीट) प्रदान की जाएगी, जो उनके आगे की कक्षाओं में अध्ययन और अन्य प्रक्रियाओं में लाभदायक सिद्ध होगी।

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