भूमियों के व्यपवर्तन हेतु अब अनुमति आवश्यक नहीं

रायपुर।छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 172 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार अब कुछ निर्धारित क्षेत्रों में भूमि के व्यपवर्तन (डायवर्जन) के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं होगी।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 13 दिसंबर 2025 को जारी इस अधिसूचना के अनुसार यह प्रावधान नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत तथा उनसे लगे निर्धारित परिधि के क्षेत्रों में लागू होगा।

इन क्षेत्रों में नहीं लगेगी अनुमति की बाध्यता—

नगर निगम एवं नगरपालिका क्षेत्र

नगर निगम व नगरपालिका की बाह्य सीमा से 5 किलोमीटर तक का क्षेत्र

नगर पंचायत क्षेत्र

नगर पंचायत की बाह्य सीमा से 2 किलोमीटर तक का ग्रामीण क्षेत्र

हालांकि अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उक्त भूमियों का पुनर्निर्धारण (री-असेसमेंट) किया जाएगा।

यह अधिसूचना राज्यपाल के नाम से एवं आदेशानुसार संयुक्त सचिव अरविन्द कुमार एक्का द्वारा जारी की गई है। सरकार के इस निर्णय से भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाएं सरल होंगी, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ उद्योग एवं निवेशकों को भी बड़ी सुविधा मिलने की संभावना है।

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