सोशल मीडिया में वायरल फर्जी आवेदन की जांच की मांग, रेत माफियाओं पर शक
धमतरी। इन दिनों ग्राम पंचायत बंजारी सुर्खियों में है। सरपंच के नाम से पुलिस अधीक्षक धमतरी को संबोधित एक कथित आवेदन सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल किया जा रहा है, जिसे पंचायत प्रतिनिधियों ने फर्जी करार दिया है।
इस पूरे मामले को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि कहीं अवैध रेत उत्खनन, अवैध मुरूम खनन और जिले में हो रही अवैध प्लाटिंग के खिलाफ आवाज उठाना ग्राम पंचायत बंजारी के उपसरपंच चंद्रप्रकाश सिन्हा को भारी तो नहीं पड़ रहा?
उपसरपंच ने किया वायरल आवेदन का खंडन
सोशल मीडिया में वायरल आवेदन के संबंध में जब उपसरपंच चंद्रप्रकाश सिन्हा से चर्चा की गई, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरपंच द्वारा एसपी या किसी अन्य व्यक्ति के नाम कोई भी आवेदन जारी नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरपंच और उपसरपंच को बदनाम करने की नीयत से विपक्षियों द्वारा तैयार किया गया फर्जी आवेदन है।
उन्होंने बताया कि वायरल आवेदन हाथ से लिखा हुआ नहीं, बल्कि कंप्यूटर से टाइप किया गया है, ताकि लिखावट की पहचान न हो सके। साथ ही यह भी कहा कि गांव में सरपंच के हस्ताक्षर-सील कई सरकारी दस्तावेजों पर होते हैं, जिनकी नकल कर फर्जी हस्ताक्षर करना विपक्षियों के लिए कठिन नहीं है।
रेत माफियाओं की भूमिका पर शंका
उपसरपंच चंद्रप्रकाश सिन्हा ने बताया कि वे लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं और जिले में महानदी से हो रहे अवैध रेत उत्खनन, अवैध मुरूम खनन और अवैध प्लाटिंग के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। इसी कारण रेत माफियाओं में हड़कंप है और संभव है कि इसी दबाव में यह षड्यंत्र रचा गया हो।
उन्होंने यह भी कहा कि धमतरी जिले के अधिकांश पत्रकार ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं, लेकिन कुछ तथाकथित लोग ऐसे भी हैं, जिनकी आजीविका रेत माफियाओं की कृपा पर निर्भर है। ऐसे लोगों को अवैध गतिविधियों के खिलाफ लिखी खबरों से परेशानी होती है।
सरपंच का बयान
ग्राम पंचायत बंजारी की सरपंच टिकेश्वरी ध्रुव ने भी वायरल आवेदन को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार का कोई आवेदन न तो एसपी को दिया गया है और न ही किसी अन्य को। उन्होंने इसे विपक्षियों की साजिश बताते हुए कहा कि यह ग्राम पंचायत को बदनाम करने का प्रयास है।
एसपी का पक्ष
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस तरह के किसी आवेदन की कोई जानकारी नहीं है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि को इस तरह बदनाम न किया जा सके।

