आगडीह हवाई पट्टी पर राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू का आत्मीय स्वागत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया
तीन राज्यों के मुख्यमंत्री एक मंच पर मौजूद

आगडीह हवाई पट्टी पर राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू का आत्मीय स्वागत
जशपुर।अन्तर्राज्यीय जन सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा–2025’ में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को झारखंड के मांझाटोली पहुंचीं। इससे पूर्व वे जशपुर स्थित आगडीह हवाई पट्टी पर उतरीं, जहां उनका स्वागत छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित बांस एवं सवई घास से बने हस्तशिल्प उत्पाद भेंट किए। राष्ट्रपति ने इन पारंपरिक शिल्पों की सराहना करते हुए कारीगरों की मेहनत और जनजातीय कला-संस्कृति की प्रशंसा की।
इसके पश्चात राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल साहेब कार्तिक उराँव चौक, मांझाटोली पहुंचीं। कार्यक्रम में झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री एक ही मंच पर उपस्थित थे, जो इस आयोजन की विशेष उपलब्धि रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत के साथ हुआ। आयोजन पंखराज साहेब कार्तिक उराँव आदिवासी शक्ति स्वायत्तशासी विश्वविद्यालय निर्माण समिति (झारखंड–छत्तीसगढ़–ओडिशा) द्वारा किया गया।
अति विशिष्ट अतिथियों में यह रहें मौजूद
इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू अति अति विशिष्ट अतिथियों में विष्णु देव साय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़,रमेन डेका राज्यपाल, छत्तीसगढ़,संतोष कुमार गंगवार राज्यपाल, झारखंड,हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री, झारखंड,मोहन चरण माझी मुख्यमंत्री, ओडिशा,जुएल ओराम केंद्रीय मंत्री, जनजातीय कार्य, भारत सरकार,फग्गन सिंह कुलस्ते अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति / अनुसूचित जाति रहें। इस दौरान छत्तीसगढ़, झारखंड ,उड़ीसा तीन राज्यों के मुख्यमंत्री एक मंच पर मौजूद रहें। राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने अपने उधबोधन में कहा यह वीरों की भूमि है। अल्बर्ट एक्का ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।
कार्तिक उराँव विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई
कार्यक्रम में उपस्थित जशपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता राम प्रकाश पांडे ने बताया कि इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापना की मांग लंबे समय से की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 में कार्तिक उराँव ने विश्वविद्यालय की मांग उठाई थी, परंतु अब तक इसका निर्माण नहीं हो सका। मंगलवार को कार्तिक उराँव विश्वविद्यालय समिति के द्वारा विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि क्षेत्र में विश्वविद्यालय का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा दो राज्यों को मिलकर इस पहल को आगे बढ़ाना चाहिए।
राष्ट्रपति के इस वक्तव्य के बाद क्षेत्र में विश्वविद्यालय निर्माण को लेकर उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है विश्वविद्यालय की स्थापना से शिक्षा, रोजगार और समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।

