
रायपुर। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 2012 बैच के अधिकारी एवं वर्तमान में कबीरधाम जिले में पदस्थ पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह छवई ने जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) वेतनमान एवं उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) पद पर पदोन्नति नहीं दिए जाने को लेकर मुख्यमंत्री को अभ्यावेदन सौंपा है। उन्होंने पदोन्नति प्रक्रिया में संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन तथा भेदभाव का आरोप लगाया है।
अभ्यावेदन में एसपी छवई ने उल्लेख किया है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा उनकी संनिष्ठा प्रमाणित करते हुए कई बार पदोन्नति की अनुशंसा की जा चुकी है, लेकिन लोकायुक्त में विवेचना स्तर पर प्रकरण लंबित होने के आधार पर उन्हें पदोन्नति से वंचित रखा गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि समान परिस्थिति में अन्य आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति प्रदान की गई है, जबकि उनके विरुद्ध न तो निलंबन है, न आरोप पत्र जारी हुआ है और न ही कोई आपराधिक प्रकरण न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद उन्हें JAG वेतनमान एवं DIG पद की पदोन्नति नहीं दी गई, जो संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत अवसर की समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
बेवजह पदोन्नति रोकी गई
एसपी छवई ने भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी पदोन्नति नियमों का हवाला देते हुए कहा कि केवल निलंबन, विभागीय आरोप पत्र या न्यायालय में लंबित आपराधिक प्रकरण की स्थिति में ही पदोन्नति रोकी जा सकती है, जबकि उनका मामला इन श्रेणियों में नहीं आता।
अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि महादेव सट्टा ऐप सहित अन्य प्रकरणों में विवेचना लंबित होने के बावजूद कुछ अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है, जिससे दोहरी नीति और पूर्वाग्रह स्पष्ट होता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि नियमों के अनुरूप विचार करते हुए उन्हें वरिष्ठ वेतनमान एवं पदोन्नति का लाभ प्रदान किया जाए, ताकि समानता के अधिकार की रक्षा हो सके।
इस संबंध में अभ्यावेदन की प्रतिलिपि भारत सरकार के गृह मंत्रालय एवं पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ को भी भेजी गई है।

