आज़ादी के 70 साल बाद भी ईचकेला पंचायत में नहीं मुक्तिधाम

बरिश में अधजली होती है लाशें

नही सुनी फरियाद तो ,ग्रामीण कर मंदिर में पूजा पाठ



जशपुर।देश की आज़ाद के 70 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जशपुर जिला मुख्यालय से महज़ 12 किलोमीटर दूर स्थित आदर्श ग्राम पंचायत ईचकेला आज भी एक अदद मुक्तिधाम से वंचित है। पंचायत के रजौटी, जामटोली, घोड़ा टोली, सरना टोली और चार टोली में रहने वाली 5000 से अधिक आबादी को अंतिम संस्कार के लिए आज भी अमानवीय हालातों से गुजरना पड़ता है।

अधजली लाशें, टूटता मानवीय सम्मान


मुक्तिधाम न होने के कारण ग्रामीण रजौटी-चार टोली के पास खुले मैदान में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है।
कीचड़ से भरे रास्तों के कारण शव ले जाना मुश्किल हो जाता है। गीली लकड़ियों के कारण कई बार शव पूरी तरह जल नहीं पाते, जिससे परिजनों को अधजले शव को दफनाने जैसी पीड़ादायक मजबूरी झेलनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है जीते-जी तो संघर्ष है ही, मरने के बाद भी सम्मान न मिलना सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।”

न पक्की सड़क, न पुलिया

श्मशान तक पहुंचने के लिए न पक्की सड़क है, न पुलिया। अंतिम यात्रा अक्सर कीचड़ में फंस जाती है। हर बरसात ग्रामीणों की पीड़ा को और गहरा कर देती है।

वादे बहुत, काम शून्य


हर चुनाव में मुक्तिधाम निर्माण के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन वर्षों से यह मांग फाइलों में दबी हुई है।
सेवानिवृत्त शिक्षक भुनेश्वर सिंह ने इस समस्या को लेकर वर्तमान विधायक रायमुनी भगत को ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पूर्व विधायकों और जनप्रतिनिधियों को भी कई बार अवगत कराया गया, मगर हर बार केवल आश्वासन देकर मामला शांत करा दिया गया।

अधूरा निर्माण, अधूरी जिम्मेदारी


करीब 10 साल पहले मुक्तिधाम निर्माण की शुरुआत की गई थी। दो अलग-अलग स्थानों पर नींव और खंभे खड़े कर दिए गए, लेकिन कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। इसके बाद किसी भी सरपंच या प्रशासनिक अधिकारी ने इसे पूरा कराने की पहल नहीं की।

अब भगवान भरोसे ग्रामीण


लगातार अनदेखी से त्रस्त ग्रामीण अब मंदिरों में सामूहिक पूजा-पाठ कर रहे हैं, ताकि शायद उनकी यह बुनियादी मांग पूरी हो सके।
साल 2024 में समाचार प्रकाशन के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया था। उस समय जनपद सीईओ लोकहित भगत ने आश्वासन दिया था, लेकिन मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।

ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल मुक्तिधाम, पक्की सड़क और पुलिया निर्माण के लिए फंड जारी कर कार्य प्रारंभ कराया जाए, ताकि कम से कम मृत्यु के बाद इंसान को सम्मानजनक अंतिम विदाई मिल सके।

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