तिल्दा-नेवरा वीरेन्द्र साहू ।बैकुण्ठ रेलवे स्टेशन के समीप स्थित आदित्य विद्या मंदिर में शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। यहाँ विद्यालय की शिक्षिका राखी मैडम बच्चों को संगीत के माध्यम से पढ़ाई कराते हुए ज्ञान प्रदान कर रही हैं। इस नवीन पहल से न केवल विद्यार्थियों की रुचि पढ़ाई की ओर बढ़ रही है बल्कि उनमें आत्मविश्वास और रचनात्मकता भी विकसित हो रही है।
राखी मैडम ने बताया कि बच्चों को अगर पारंपरिक तरीके से पढ़ाया जाए तो वे जल्दी ऊब जाते हैं, लेकिन जब गीत और संगीत के साथ शिक्षा दी जाती है तो वे उत्साहपूर्वक उसमें भाग लेते हैं। उदाहरण के तौर पर वर्णमाला, पहाड़े, पर्यावरण और सामाजिक शिक्षा जैसे विषयों को गीतों में पिरोकर सिखाया जाता है, जिससे बच्चे आसानी से याद कर पाते हैं।
इस अवसर पर विद्यालय की अन्य शिक्षिकाएँ भारती मैम, शालिनी मैम और ममता मैम भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। विद्यालय में तैनात आया भी बच्चों को सहयोग करती रहीं।
कार्यक्रम के दौरान कई बच्चों ने बताया कि उन्हें अब पढ़ाई बोझ नहीं लगती, बल्कि गीत-संगीत के जरिये पढ़ना उन्हें खेल जैसा लगता है। छोटे बच्चों ने तालियों और सुरों के साथ पहाड़े सुनाए तो वहीं बड़ी कक्षाओं के बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर गीत गाकर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
विद्यालय प्रबंधन ने भी इस पहल की सराहना की। प्रबंधन का मानना है कि शिक्षा को रोचक और व्यवहारिक बनाना समय की मांग है। बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को उभारने के लिए इस तरह की पहल बेहद कारगर साबित होती है।
गाँव के अभिभावकों ने भी शिक्षकों के इस प्रयास को सराहा और कहा कि संगीत के साथ शिक्षा मिलने से बच्चे अब घर पर भी खुशी-खुशी पढ़ाई करते हैं।
इस तरह आदित्य विद्या मंदिर बैकुण्ठ में संगीत आधारित शिक्षा एक सफल प्रयोग के रूप में सामने आ रही है, जो न केवल बच्चों की पढ़ाई को सरल बना रही है बल्कि उनके जीवन कौशल और रचनात्मकता को भी निखार रही है।

