रायपुर, 6 अक्टूबर 2025। राज्य में चर्चित कस्टम मिलिंग स्कैम प्रकरण में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने आज बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी अनिल टुटेजा एवं अनवर ढेबर के विरुद्ध माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में 1,500 पन्नों का अभियोग पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है।
प्रकरण अपराध क्रमांक 01/2024 के तहत दर्ज है। चालान में आरोप लगाया गया है कि दोनों आरोपियों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 384, 409 एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं 11, 13(1)(क) और 13(2) के तहत गंभीर अपराध किए हैं। वर्तमान में दोनों आरोपी केंद्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध हैं।
इससे पहले फरवरी 2025 में ईओडब्ल्यू ने इसी प्रकरण में रोशन चन्द्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ पहला चालान प्रस्तुत किया था।
20 करोड़ की अवैध वसूली का आरोप
जांच में सामने आया है कि आरोपी अनिल टुटेजा, जो उस समय छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन से जुड़ा हुआ था, ने पदाधिकारियों के साथ मिलकर राइस मिलरों से अवैध वसूली की। बताया गया है कि टुटेजा के दबाव में मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारी राइस मिलरों के बिलों को रोके रखते थे, जिससे मिलर मजबूर होकर 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से रिश्वत राशि देने को विवश होते थे।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस प्रक्रिया से आरोपी टुटेजा ने कम से कम 20 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
अनवर ढेबर का राजनीतिक प्रभाव
ईओडब्ल्यू ने चालान में उल्लेख किया है कि अनवर ढेबर वर्ष 2022-23 में एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति थे। आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान प्राप्त डिजिटल साक्ष्य बताते हैं कि वह न केवल शराब घोटाले, बल्कि पीडब्ल्यूडी, वन विभाग जैसे अन्य महत्वपूर्ण सरकारी विभागों पर भी प्रत्यक्ष प्रभाव डालते थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, ढेबर ने कस्टम मिलिंग स्कैम में टुटेजा के लिए राइस मिलरों से की गई अवैध वसूली की राशि के संग्रहण, निवेश और उपभोग में अहम भूमिका निभाई।
अन्य आरोपियों पर जांच जारी
प्रकरण में रामगोपाल अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध विवेचना अभी जारी है।

