रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाला प्रकरण में सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चैतन्य बघेल एवं दीपेन्द्र चावड़ा को गिरफ्तार किया है। दोनों को गिरफ्तार कर रायपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 06 अक्टूबर 2025 तक पुलिस रिमाण्ड पर भेजा गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी उस मामले से जुड़ी है जिसमें वर्ष 2024 में अपराध क्रमांक 04/2024 दर्ज किया गया था। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा-7 और 12 (संशोधित अधिनियम 2018 सहित) के साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (ठगी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी हेतु कूटरचना), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) तथा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि शराब घोटाले में सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया था। इसमें अधिकारियों, शराब आपूर्तिकर्ताओं और बिचौलियों की मिलीभगत की बात सामने आई थी। इसी कड़ी में कई प्रभावशाली व्यक्तियों से पूछताछ की जा चुकी है और अब गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज की गई है।
चैतन्य बघेल और दीपेन्द्र चावड़ा की भूमिका को लेकर ब्यूरो पहले से निगरानी कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह आरोप सामने आए हैं कि दोनों ने मिलकर न केवल अवैध लेन-देन को अंजाम दिया, बल्कि दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाई। यही कारण है कि अदालत से दोनों का पुलिस रिमाण्ड लिया गया है, ताकि पूछताछ के दौरान और कड़ियों को जोड़ा जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले में और भी नाम सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन और कथित हवाला नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है। रिमाण्ड अवधि के दौरान आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जाएगा कि इस मामले में किन-किन स्तरों तक गठजोड़ था और किसे किस प्रकार लाभ पहुंचाया गया।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला पिछले एक वर्ष से सुर्खियों में है। विपक्ष लगातार सरकार पर इस मामले में कठोर कार्रवाई की मांग करता रहा है। वहीं, अब चैतन्य बघेल और दीपेन्द्र चावड़ा की गिरफ्तारी से यह संकेत मिला है कि जांच एजेंसियां प्रकरण को गंभीरता से आगे बढ़ा रही हैं।
ब्यूरो अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रकरण में आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

