दीपावली में पंडवानी गूंजे तीजन बाई की परंपरा के स्वर

पद्म श्री पंडवानी गायिका तीजन बाई जैसी विभूतियों ने रखा जीवंत

धमतरी।by चैन सिंह गहने। जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम मैनपुर में दीपावली का पर्व पारंपरिक उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित पंडवानी कार्यक्रम ने ग्रामवासियों को लोककला और भक्ति के रंग में रंग दिया। ग्राम काँकालीन (जिला बालोद) से आई कलाकार टीम ने अपनी प्रस्तुति से उस लोकधारा को जीवंत कर दिया, जिसकी अमिट पहचान पद्म विभूषण तीजन बाई रही हैं।

गायिका अंशुया गंधरवा ने पांडवों की वीरगाथाओं को अपने सशक्त स्वर में प्रस्तुत करते हुए तीजन बाई की शैली की झलक दिखाई। उनके साथ तबला पर योगेश, नाल पर रामशोरूप और कुलदीप, हारमोनियम पर जीवन विश्कर्मा, बेंजो पर जागेश्वर गंधरवा तथा साथी कलाकार किरण कुमार गंधरवा ने संगत दी। पूरे कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोकधुनों और तीजन बाई की परंपरा का समरस संगम दिखाई दिया।

इस सांस्कृतिक आयोजन का संचालन ग्राम महिला प्रकोष्ठ की महिलाओं — हिरमोतीन बाई नेताम, लक्ष्मी बाई नेताम, सुकून बाई नेताम, हीरोदी ध्रुव, फूलभाषण मांडवी, मुनेश्वरी नेताम, लीला बाई मरकाम और विराजो बाई मरकाम — के नेतृत्व में किया गया।

कार्यक्रम में सरपंच सुरेंद्र कुमार नेताम, उपसरपंच राजेश्वर चेलक, ग्राम अध्यक्ष हरिराम ध्रुव, वरिष्ठ नागरिक देव सिंह ध्रुव, रमेश कुमार नेताम, भुलेश्वर सिंह साहू, मनोज कुमार नेताम, घनशुराम मरकाम, अमर सिंह मरकाम, गुलशन ध्रुव, उमेंद्र नेताम, देव कुमार ध्रुव, नंदकिशोर ध्रुव, अशोक कुमार ध्रुव, रेखा राज ध्रुव, समारू राम और हरीश कुमार साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

दीपावली पर्व के अवसर पर हुए इस पंडवानी कार्यक्रम ने ग्राम मैनपुर में लोककला की वह आत्मा जगा दी, जिसे तीजन बाई जैसी विभूतियों ने जीवंत बनाए रखा है। यह आयोजन ग्रामीण संस्कृति, एकता और परंपरा का प्रेरणास्रोत बन गया।

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