प्रवर्तन निदेशालय ने आईएएस–आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रामक अटकलों का किया खंडन

29 सितंबर 2025, रायपुर।छत्तीसगढ़ में हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर जो अटकलें फैल रही थीं, उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया गया है। मीडिया और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि ईडी ने 10 आईएएस–आईपीएस अधिकारियों के विरुद्ध पत्र लिखा है। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि ईडी ने कुल मिलाकर आधा दर्जन से भी कम नौकरशाहों—आईएएस, आईपीएस और रापुसे अधिकारियों सहित—के खिलाफ ही कार्रवाई का अनुरोध किया है।

यह जानकारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 66(2) के अंतर्गत सूर्याकांत तिवारी एवं अन्य मामलों से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय ने केवल इतना अनुरोध किया है कि “उक्त लोकसेवकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई उचित समझे जाने पर की जाए।” इस दौरान अधिकारियों के नाम और अन्य संवेदनशील विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का उद्देश्य केवल जांच प्रक्रिया को उचित और पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाना है। इसमें किसी भी तरह की राजनीतिक या निजी अफवाहों को पुष्ट करने का इरादा नहीं है। अधिकारियों और आम जनता से अनुरोध किया गया है कि वे भ्रामक और अप्रमाणित दावों से दूर रहें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर ही भरोसा करें।

विशेषज्ञों के अनुसार, जांच के इस चरण में मीडिया रिपोर्ट और अफवाहों में अंतर करना आवश्यक है। ईडी द्वारा केवल सीमित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की गई है और इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे विभाग या अन्य अधिकारी किसी जांच के दायरे में हैं। यह कदम कानून के तहत जांच की संवेदनशील प्रकृति और प्रक्रियाओं की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

अधिकारी सूत्रों के अनुसार, जांच की संवेदनशीलता और चरणों को देखते हुए नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। आम जनता से आग्रह किया गया है कि वे किसी भी प्रकार की अटकलों में न आएं और केवल प्रामाणिक जानकारी पर भरोसा करें।

छत्तीसगढ़ में यह मामला अब तक कई अटकलों और अफवाहों का केंद्र बन चुका था। ईडी के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सिर्फ सीमित अधिकारी ही कार्रवाई के दायरे में हैं और कोई भी दावा कि 10 या उससे अधिक आईएएस–आईपीएस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई, वह भ्रामक और अप्रमाणित है।

इस तरह, प्रवर्तन निदेशालय ने अटकलों और अफवाहों को खारिज करते हुए जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवेदनशीलता को बनाए रखने का संदेश दिया है।

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