फर्जी दस्तावेज तैयार कर न्यायालय को भ्रमित करने के आरोप में EOW-ACB अधिकारियों पर दांडिक परिवाद

तीनों अधिकारियों को नोटिस

रायपुर, 10 अक्टूबर 2025।आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के अधिकारियों पर न्यायिक प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत करने का गंभीर आरोप सामने आया है।

मामला अपराध क्रमांक 02/2024 एवं 03/2024 से संबंधित है। उक्त प्रकरण में आरोपी निखिल चंद्राकर, जो किसी अन्य मामले में जिला जेल धमतरी में निरुद्ध था, के संबंध में दिनांक 16 जुलाई 2025 को सूचना प्रतिवेदन दर्ज कर विवेचना की जा रही थी।
विवेचना के दौरान 17 जुलाई 2025 को निखिल चंद्राकर को धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत बयान दर्ज कराने हेतु न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रायपुर (पीठासीन अधिकारी कामिनी वर्मा) के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।

यह आरोप

आरोप है कि विवेचकों ने न्यायालय में वास्तविक बयान दर्ज न कराते हुए अपने कार्यालय में कंप्यूटर से दस्तावेज तैयार किया, जिसे पेन ड्राइव के माध्यम से न्यायालय को सौंपा गया, और फिर उस दस्तावेज का प्रिंट लेकर उसे न्यायालय की आधिकारिक प्रति की तरह उपयोग कर माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
जांच में पाया गया कि उस दस्तावेज पर केवल निखिल चंद्राकर के हस्ताक्षर हैं, जबकि न्यायालय द्वारा उसका कोई कथन दर्ज नहीं किया गया था।

बाद में न्यायालय से 16–17 जुलाई 2025 की आदेश पत्रिकाओं की प्रमाणित प्रतिलिपियाँ प्राप्त कर फोरेंसिक परीक्षण कराया गया, जिसमें यह निष्कर्ष निकला कि विवेचकों द्वारा तैयार दस्तावेज का फ़ॉन्ट न्यायालय की प्रमाणित प्रतियों से भिन्न है, और उसमें मिश्रित फ़ॉन्ट का उपयोग किया गया है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि दस्तावेज विवेचकों द्वारा स्वयं तैयार किया गया झूठा दस्तावेज था।

शिकायत भेजा

अधिवक्ता गिरीश चंद्र देवांगन द्वारा इस संबंध में उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर के सतर्कता विभाग को लिखित शिकायत भेजी गई है तथा EOW/ACB के निदेशक अमरेश मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रेश ठाकुर एवं उप पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा के विरुद्ध न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रायपुर (पीठासीन अधिकारी आकांक्षा बेक) की अदालत में दांडिक परिवाद दायर किया गया है।

न्यायालय ने परिवाद पर संज्ञान लेते हुए तीनों अधिकारियों को नोटिस जारी किया है तथा उन्हें 25 अक्टूबर 2025 को न्यायालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

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