सफलता और समृद्धता के लिए विधि-विधान से लक्ष्मी की पूजा कर मनाई जाती है अक्षय तृतीया का त्यौहार

रायपुर (News27) 10.05.2024 । भारतीय सनातन धर्म में तीज त्यौहारों का बहुत महत्व है। इसी तरह गर्मी के दिनों में आम और गुड द्धारा निर्मित पकवान के साथ वैशाख महीने के तीसरे दिन अक्षया तृतीया माना जाता है। जिसे आखा तीज भी कहते है। दरअसल जैन समाज में इस दिवस उपवास रखकर गन्ने का रस पीते हैं गन्ने को ईख भी कहा जाता है संभवतः इसलिए भी इसे आखा तीज कहा जाता है। ण्ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। अक्षय तृतीया का मतलब होता हैण् आनंदए सफलता और समृद्धि में कोई कमी न होनाण् इस दिन विधि.विधान से देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती हैण् ऐसा माना जाता है कि इस शुभ अवसर पर पूजा करने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती हैण् इससे आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। यह दिन कई मायनों में खास माना जाता है। आज के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ मां अन्नपूर्णा की भी पूजा होती है। गरीबों में अन्न बांटे जाते हैं। इस दिन से महर्षि वेदव्यास जी महाभारत लिखना प्रारंभ किया था
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