रायपुर (News27)12.02.2024 । प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत 7 लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी जैसे-आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, जॉबदर, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, मानदेय, अशंकालिक, पृथक अनियमित कर्मचारी 150 से अधिक संगठनों के माध्यम से अपने विभिन्न मांगो के लिए निरंतर संघर्षरत है|
उल्लेखनीय है कि ये अनियमित कर्मचारी विगत 5, 10, 15, 20, 25 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत है तथा प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है| सामान कार्य करने के बावजूद ये नियमित कर्मचारी से आधे से कम वेतन में कार्य करने विवश है| वर्तमान में इनकी स्थिति मध्यकालीन बन्धुआ मजदूर से बदतर है| बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारी, प्रशासनिक दबाव के कारण ये अनियमित कर्मचारी अपने विरुद्ध हो रहे अन्याय का चुप-चाप सह रहे है| उपरोक्त कारणों से समाज के पढ़े-लिखे नव-युवा/युवतियां मानसिक अवसाद से ग्रसित हो रहे है|
वर्षों से संघर्षरत इन कर्मचारियों की मांगे तो पूरी नहीं उल्टा विभिन्न धाराओं में विभिन्न संगठन के कर्मचारी नेताओं पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया जिससे कोर्ट के चक्कर काटते-काटते परेशान हो गए है|
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारी गण माननीय मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री द्वय से मिलकर इन मुकदमा को वापस लेने ज्ञापन के साथ अनुरोध किया है, परन्तु अद्यतन किसी प्रकार की प्रतिउत्तर प्राप्त नहीं हुई है| अतः माननीय मुख्यमंत्री, गृहमंत्री महोदय से अपील है कि अनियमित कर्मचारी नेताओं पर दर्ज मुकदमा (ऍफ़ आई आर) वापस लें|
मांग के प्रमुख बिंदु:
- समस्त अनियमित, दैनिक वेतनभोगी एवं संविदा कर्मचारी/अधिकारीयों को नियमित किया जावे तथा नियमितीकरण से वंचित को स्थायीकर्मी बनाकर स्थायीकरण किया जावे|
- विगत वर्षों से निकाले गए/छटनी किये गए अनियमित कर्मचारियों को बहाल कर छटनी पर रोक लगाई जावे।
- अंशकालिक कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जावे|
- शासकीय सेवाओं में आउट सोर्सिंग, सेवा प्रदाता, समिति के माध्यम से नियोजन, ठेका को पुर्णतः समाप्त कर कर्मचारियों का समायोजन किया जावे तथा नियत अवधि में नियमित किया जावे।
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