हमारी भावनाओं को बल देता है नाटक: शशिमोहन सिंह

- जशपुर। पांच दिवसीय जशरंग राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का शुभारंभ 3 अप्रैल गुरुवार देर शाम स्थानीय वशिष्ठ सामुदायिक भवन में किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि श्री सिंह, कोलकाता की रंगकर्मी संजीता मुखर्जी और युवा पत्रकार सह समीक्षक बिकास के शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। स्वागत भाषण में छत्तीसगढ़िया क्लाउड के उपाध्यक्ष डॉ आनंद कुमार पाण्डेय ने नाट्य महोत्सव की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहली बार इस तरह का नाट्य महोत्सव का आयोजन केंद्र व राज्य सरकार सहित जिला प्रशासन एवं समाज के प्रबुद्धजनों के सहयोग से किया गया। डॉ पाण्डेय ने मुख्य अतिथि एसएसपी सिंह को अंगवस्त्र, पौधा तथा स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया वहीं पार्षद रामा शंकर गुप्ता ने बिकास के शर्मा एवं मधु वाजपेयी ने रंगकर्मी संजीता मुखर्जी को सम्मानित किया। अपने संबोधन में एसएसपी सिंह ने नाटक को एक जीवंत विधा बताते हुए कहा कि समकालीन दौर में डिजिटल मीडिया का चलन बढ़ा अवश्य है किंतु नाटकों की उपयोगिता को कम नहीं आंका जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि सामूहिक रूप से बैठकर ऐसे महोत्सव में नाट्य मंचन को देखना एक सुखद अनुभव होता है। नाटक इंसान को एक दूसरे से जोड़ता है। जिंदगी इतनी तेज हो गई है कि बहुत सारी चीजे हमसे छुटती जा रही हैं। नाटक समाज में जो घटीत होता है वही मंच पर प्रस्तुत करता है। जशपुर में पहली बार नाट्य महोत्सव आयोजित करने हेतु उन्होंने आयोजकों को बधाई दी।
वहीं युवा पत्रकार सह समीक्षक श्री शर्मा ने कहा कि इतिहास बताता है कि जशपुर क्षेत्र में डोम राजाओं का अधिपत्य था और आज़ादी के बाद से यहां की संस्कृति को बढ़ावा देने में शासन सहित राज परिवार का अमिट योगदान रहा है। जशपुर में सांस्कृतिक उत्सव को कई आयोजित किए जाते हैं लेकिन नाट्योत्सव के गवाह पहली बार जशपुर के कलाप्रेमी बन रहे हैं यह एक ऐतिहासिक घटना है। पहली बार जशरंग जैसे राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का आयोजन सांस्कृतिक मोर्चे पर एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने आगे कहा कि पालकों को चाहिए कि वे बच्चों को नाटकों से जोड़ने का काम करें ताकि उनका सर्वांगीण विकास आसान हो सके। मंच संचालन स्थानीय शिक्षक आशुतोष शर्मा ने किया।
अकाल और समाज से युद्ध करती स्त्री की कथा
बांग्ला के प्रख्यात लेखक विभूति भूषण बंधोपाध्याय की कहानी पर आधारित नाटक ‘शीतल पाटी’ की पृष्ठभूमि बंगाल में पड़े अकाल काल की है। एकल अभिनय करते हुए अभिनेत्री संजीता मुखर्जी ने अपनी जीवंत प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को बांधे रखा। उन्होंने हाजू नामक एक गरीब महिला के किरदार को मंच पर बखूबी उतारा जो अपने बच्चे को पालने एवं भूख से लड़ने हेतु अनेकानेक संघर्षों से गुजरती है। एकल अभिनय में संजीता आंगिक और वाचिक दोनों की भावों को व्यक्त करने में सफल होती है, जिसकी तस्दीक कुछ दमदार संवादों के प्रस्फुटन के दौरान और मंचीय प्रस्तुति के बाद दर्शकों की करतल ध्वनि ने किया। प्रस्तुति में प्रकाश संयोजन अश्र लाइट्स भिलाई का रहा.

